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Karan Bedi
sabhi ne dekha bas chehra hamaara
sabhi ne dekha bas chehra hamaara | सभी ने देखा बस चेहरा हमारा
- Karan Bedi
सभी
ने
देखा
बस
चेहरा
हमारा
किसी
ने
दिल
नहीं
देखा
हमारा
नहीं
टिक
पाया
इक
रिश्ता
हमारा
हमें
ले
डूबा
ये
ग़ुस्सा
हमारा
तुम्हें
हाँ
की
थी
अच्छा
सोचकर
पर
ग़लत
निकला
है
अंदाज़ा
हमारा
जहाँ
में
बाँटता
फिरता
है
वो
इश्क़
जो
होना
चाहिए
हिस्सा
हमारा
मिले
जब
जिस्म
आपस
में
हमारे
तो
रिश्ता
हो
गया
गहरा
हमारा
बड़ी
आसानी
से
बोला
उन्होंने
'करन'
अब
कुछ
नहीं
लगता
हमारा
- Karan Bedi
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बुराई
करना
आदत
में
नहीं
है
वगरना
ख़ूबी
बतलाते
तुम्हारी
Karan Bedi
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है
कौन
यहाँ
दोस्त
हमारा
उसे
कहना
सोचे
ज़रा
इक
बार
दोबारा
उसे
कहना
क्या
याद
है
तुम
को
भी
पुराने
वो
सभी
दिन
कोई
था
तुम्हें
जान
से
प्यारा
उसे
कहना
मौसम
सभी
बेकार
नज़र
आते
हैं
हम
को
भाता
नहीं
कोई
भी
नज़ारा
उसे
कहना
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Karan Bedi
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चलने
से
रोकनी
है
मुझ
को
हवा
शाम
के
बाद
छत
पे
आती
है
जलाने
वो
दिया
शाम
के
बाद
सारा
दिन
जिस
को
भुलाने
में
निकल
जाता
है
करता
हूँ
उस
से
ही
मिलने
की
दु'आ
शाम
के
बाद
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Karan Bedi
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हर
एक
शख़्स
में
उस
को
तलाशता
हूँ
मैं
वो
मुझ
को
अपना
तलबगार
कर
के
छोड़
गया
Karan Bedi
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सहरा
में
कहीं
चाँद
की
चादर
सी
बिछी
थी
तन्हाई
का
मंज़र
भी
चमकता
नज़र
आया
Karan Bedi
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