zarroon men kunmunaati hui kaayenaat hooñ | ज़र्रों में कुनमुनाती हुई काएनात हूँ

  - Bashir Badr
ज़र्रोंमेंकुनमुनातीहुईकाएनातहूँ
जोमुंतज़िरहैजिस्मोंकीमैंवोहयातहूँ
दोनोंकोप्यासामाररहाहैकोईयज़ीद
येज़िंदगीहुसैनहैऔरमैंफ़ुरातहूँ
नेज़ाज़मींपेगाड़केघोड़ेसेकूदजा
परमैंज़मींपेआबला-पाख़ालीहातहूँ
कैसाफ़लकहूँजिसपेसमुंदरसवारहै
सूरजभीमेरेसरपेहैमैंकैसीरातहूँ
अंधेकुएँमेंमारकेजोफेंकआएथे
उनभाइयोंसेकहियोअभीतकहयातहूँ
आतीहुईट्रेनकेजोआगेरखगई
उसमाँसेयेकहनाब-क़ैद-ए-हयातहूँ
बाज़ारकानक़ीबसमझकरमुझेछेड़
ख़ामोशरहनेदेमैंतिरेघरकीबातहूँ
  - Bashir Badr
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy