yoonhi be-sabab na fira karo koi shaam ghar men raha karo | यूँंही बे-सबब न फिरा करो कोई शाम घर में रहा करो

  - Bashir Badr
यूँंहीबे-सबबफिराकरोकोईशामघरमेंरहाकरो
वोग़ज़लकीसच्चीकिताबहैउसेचुपकेचुपकेपढ़ाकरो
कोईहाथभीमिलाएगाजोगलेमिलोगेतपाकसे
येनएमिज़ाजकाशहरहैज़राफ़ासलेसेमिलाकरो
अभीराहमेंकईमोड़हैंकोईआएगाकोईजाएगा
तुम्हेंजिसनेदिलसेभुलादियाउसेभूलनेकीदु'आकरो
मुझेइश्तिहारसीलगतीहैंयेमोहब्बतोंकीकहानियाँ
जोकहानहींवोसुनाकरोजोसुनानहींवोकहाकरो
कभीहुस्न-ए-पर्दा-नशींभीहोज़राआशिक़ानालिबासमें
जोमैंबनसँवरकेकहींचलूँमिरेसाथतुमभीचलाकरो
नहींबे-हिजाबवोचाँदसाकिनज़रकाकोईअसरहो
उसेइतनीगर्मी-ए-शौक़सेबड़ीदेरतकतकाकरो
येख़िज़ाँकीज़र्दसीशालमेंजोउदासपेड़केपासहै
येतुम्हारेघरकीबहारहैउसेआँसुओंसेहराकरो
  - Bashir Badr
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy