maan mausam ka kaha chhaai ghatta jaam utha | मान मौसम का कहा छाई घटा जाम उठा

  - Bashir Badr
मानमौसमकाकहाछाईघटाजामउठा
आगसेआगबुझाफूलखिलाजामउठा
पीमिरेयारतुझेअपनीक़समदेताहूँ
भूलजाशिकवागिलाहाथमिलाजामउठा
हाथमेंचाँदजहाँआयामुक़द्दरचमका
सबबदलजाएगाक़िस्मतकालिखाजामउठा
एकपलभीकभीहोजाताहैसदियोंजैसा
देरक्याकरनायहाँहाथबढ़ाजामउठा
प्यारहीप्यारहैसबलोगबराबरहैंयहाँ
मय-कदेमेंकोईछोटाबड़ाजामउठा
  - Bashir Badr
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy