jab tak nigaar-e-dasht ka seena dukha na tha | जब तक निगार-ए-दश्त का सीना दुखा न था

  - Bashir Badr
जबतकनिगार-ए-दश्तकासीनादुखाथा
सहरामेंकोईलाला-ए-सहराखिलाथा
दोझीलेंउसकीआँखोंमेंलहराकेसोगईं
उसवक़्तमेरीउम्रकादरियाचढ़ाथा
जागीथींनसोंमेंतमन्नाकीनागिनें
उसगंदुमीशराबकोजबतकचखाथा
ढूँडाकरोजहान-ए-तहय्युरमेंउम्रभर
वोचलतीफिरतीछाँवहैमैंनेकहाथा
इकबे-वफ़ाकेसामनेआँसूबहातेहम
इतनाहमारीआँखकापानीमराथा
वोकालेहोंटजामसमझकरचढ़ागए
वोआबजिससेमैंनेवुज़ूतककियाथा
सबलोगअपनेअपनेख़ुदाओंकोलाएथे
एकहमऐसेथेकिहमाराख़ुदाथा
वोकालीआँखेंशहरमेंमशहूरथींबहुत
तबउनपेमोटेशीशोंकाचश्माचढ़ाथा
मैंसाहिब-ए-ग़ज़लथाहसीनोंकीबज़्ममें
सरपरघनेरेबालथेमाथाखुलाथा
  - Bashir Badr
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