sunte hain ki vo shokh abhii niklaa hai ghar se | सुनते हैं कि वो शोख़ अभी निकला है घर से

  - Dharmesh bashar
सुनतेहैंकिवोशोख़अभीनिकलाहैघरसे
हरराहसेकहदोकिगुज़रजाएइधरसे
पहलेसातबस्सुमहैपहलेसातकल्लुम
कुछहोगयाहोमिरीगुस्ताख़नज़रसे
ख़्वाब-ए-परेशानतुझेरबहीसुलाए
दिलकाँपउठाहैतिरीता'बीरकेडरसे
यारान-ए-दुआ-गोकोयेमालूमनहींहै
क्याहालहुआमेरादु'आओंकेअसरसे
आँधीसेज़रापूछिएक्याउसनेभीदेखी
जोशाख़बिलखतीहुईटूटीथीशजरसे
आँसूतोफिरआँसूहैकोईपोंछहीदेगा
उसख़ूनकाक्याहोगाजोटपकाहैजिगरसे
वीरानेमेंदोबूँदोंसेक्याबातबनेगी
बादलसेकहोबरसेतोफिरटूटकेबरसे
ऐसाहोइकदोस्तभीदुश्मनमेंबदलजाए
मैंवस्लसेघबराताहूँतन्हाईकेडरसे
येजाम-ओ-सुबूउनकोहीदोजिनकेलिएहैं
गरकोईबला-नोशतरसताहैतोतरसे
कैसायेक़फ़समैंनेबनायाहैबदनका
आईनामुक़ाबिलहै'बशर'आठ-पहरस
  - Dharmesh bashar
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