bala se din to dhala shukr hai ki raat hui | बला से दिन तो ढला शुक्र है कि रात हुई

  - Dharmesh bashar
बलासेदिनतोढलाशुक्रहैकिरातहुई
ग़म-ए-हयातसेथोड़ीबहुतनजातहुई
येज़िंदगीकेतक़ाज़ेयेमौतकीदस्तक
हमारीज़ातपेक्याक्यावारदातहुई
ज़ियादा-तरतोमैंख़ुदसेहीहम-कलामरहा
कभीकभीतोमगरआपसेभीबातहुई
येदिल-ख़राशसेतेवरयेख़श्म-गींआँखें
मुझेबचाओकिफिरचश्म-ए-इल्तिफ़ातहुई
वोबादलोंकीगरजथीकिबिजलियोंकीचमक
वोजबज़मीनपेउतरीतुम्हारीज़ातहुई
शब-ए-विसालहैऔरतिश्नालबहैरिंदकोई
कोईबताएभलायेभीकोईबातहुई
वोख़ामुशीकेतरानेवोरक़्स-ए-तन्हाई
शब-ए-फ़िराक़मिरीमुद्दत-ए-हयातहुई
तूबातबातमेंजन्नतकीबातकरताहै
तोफिरबताकभीतेरीख़ुदासबातहुई
तूआजआया‘बशर’कीमिज़ाज-पुर्सीको
तुझेख़बरहैकिअर्साहुआवफ़ातहुई
  - Dharmesh bashar
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