din mire qayamat ke guzar kyun nahin jaate | दिन मेरे क़यामत के गुज़र क्यूँँ नहीं जाते

  - Dharmesh bashar
दिनमेरेक़यामतकेगुज़रक्यूँँनहींजाते
अफ़सोसकियेमुझसेेमुकरक्यूँँनहींजाते
जबचाक-ए-गिरेबाँपेरफ़ूकीहैतसल्ली
आँसूमिरीपलकोंपेठहरक्यूँँनहींजाते
आतेहैंसतानेमिरेघरयादोंकेलश्कर
आतेहैंइधरक्यूँँवोउधरक्यूँँनहींजाते
क्यादिलहीमिराबर्क़-ए-तजल्लीकाहैमरकज़
जल्वेतिरेता-हद्द-ए-नज़रक्यूँँनहींजाते
अरमानोंसेमामूरहैयेदिलकेसमुंदर
अश्कोंकीइनायतहैतोभरक्यूँँनहींजाते
दिलमुंतशिरअबहोगयाहैशहर-ए-वफ़ामें
येसंग-ए-दर-ए-यारबिखरक्यूँँनहींजाते
जबहोचुकाहैख़त्मग़म-ए-दिलकातमाशा
इनलोगोंसेपूछोकिवोघरक्यूँँनहींजाते
कबतकहो'बशर'अबयूँँहिसार-ए-ग़म-ए-दुनिया
हैंइतनेगिले-शिकवेतोमरक्यूँँनहींजाते
  - Dharmesh bashar
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