dil ko ab tak yaad hain aaghaaz-e-ulft ke maze | दिल को अब तक याद हैं आग़ाज़-ए-उल्फ़त के मज़े

  - Dharmesh bashar
दिलकोअबतकयादहैंआग़ाज़-ए-उल्फ़तकेमज़े
ख़ामुशीकीलज़्ज़तेंहर्फ़-ओ-हिक़ायतकेमज़े
छीनी-झपटीसाअतोंकालुत्फ़हंगाम-ए-सहर
शामकोबाहमदर-ओ-दीवारकेछतकेमज़े
बारहाउननीम-बाज़आँखोंमेंआँखेंडालकर
हमकोहासिलथेइसीदुनियामेंजन्नतकेमज़े
ज़ेहनमेंमहफ़ूज़हैंकाफ़िरअदाएँहुस्नकी
दिललियाकरताथाजिनकेदमसेख़ल्वतकेमज़े
मरहबावोआरज़ूएँमरहबावोवलवले
जिनसेवाबस्ताहैंतेरीमेरीसोहबतकेमज़े
कोसनेवालोंनेकोसाहैमिज़ाज-ए-हुस्नको
लूटनेवालोंनेलूटेहैंमुहब्बतकेमज़े
अहल-ए-दानिशसोरहेथेवादी-ए-इदराकमें
बस'बशर'हीलेरहाथादश्त-ए-वहशतकेमज़े
  - Dharmesh bashar
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