dil-o-nazar men agar rask-e-hoor hai koii | दिल-ओ-नज़र में अगर रश्क-ए-हूर है कोई

  - Dharmesh bashar
दिल-ओ-नज़रमेंअगररश्क-ए-हूरहैकोई
कोईबताएकिमेराक़ुसूरहैकोई
अगरचेमेरीरसाईसेदूरहैहरशय
मिरीनिगाहकीज़दमेंज़रूरहैकोई
वुफ़ूर-ए-ग़ममेंभीकैफ़-ओ-नशातकाआलम
निज़ाम-ए-दहरमेंवजह-ए-सुरूरहैकोई
कभीकभीतोजुदाईमेंयूँँहुआमहसूस
किख़ल्वतोंमेंभीमेरेहुज़ूरहैकोई
इधरगुदाज़-ए-मुहब्बतमेंदिलकीसरशारी
उधरख़ुमार-ए-जवानीमेंचूरहैकोई
वोहीचमकवोहीताबिशवोहीफुसूँ-कारी
तिराजमालहैयाबर्क़-ओ-तूरहैकोई
सुनीं'बशर'कीयेबातेंतोबरमलाबोले
तिरीसमझमेंयक़ीननफ़ुतूरहैकोई
  - Dharmesh bashar
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