aa ja ki iztiraab men hai jaañ tire baghair | आ जा कि इज़्तिराब में है जाँ तिरे बग़ैर

  - Dharmesh bashar
जाकिइज़्तिराबमेंहैजाँतिरेबग़ैर
होतानहींसुकूनकासामाँतिरेबग़ैर
कहनेकोबे-शुमारनज़ारेहैंयाँमगर
दुनियादिखाईदेतीहैवीराँतिरेबग़ैर
दिल-कशरंग-ए-ग़ुंचापुर-कैफ़बू-ए-गुल
किसकामकीहैफ़स्ल-ए-बहाराँतिरेबग़ैर
जैसेकिताब-ए-दहरपेइकहर्फ़-ए-ना-तमाम
क्याहैमिरावजूदमिरीजाँतिरेबग़ैर
सबकुछहोपासतूजोनहींहैतोकुछनहीं
ख़ालीहैमेरेशौक़कादामाँतिरेबग़ैर
जबतूमिलातोजैसेकिनारामिलामुझे
थीज़ीस्तएकमौज-ए-परेशाँतिरेबग़ैर
मंज़रतिरीजुदाईकाअबभीहैसामने
थमसीगईहैगर्दिश-ए-दौराँतिरेबग़ैर
येमो'जिज़ानहींतोभलाऔरक्याहैफिर
ज़िंदाहूँआजभीमैंसनमहाँतिरेबग़ैर
जान-ए-शादमानी-ओ-इशरतचलाभी
हैंरंज-ओ-ग़म'बशर'पेनुमायाँतिरेबग़ैर
  - Dharmesh bashar
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