sote sote jo yakaayak kabhi khul jaati hai aankh | सोते सोते जो यकायक कभी खुल जाती है आँख

  - Bano Tahira Sayeed
सोतेसोतेजोयकायककभीखुलजातीहैआँख
नीम-बेदारीमेंआतीहैनज़रएकनज़र
कहकशाँसेभीज़ियादाहैलताफ़तउसमें
आख़िर-ए-शबकेमह-ए-नीम-फ़रोज़ाँकीतरह
ख़्वाब-आवरसीशुआ'ओंमेंहैलिपटीलिपटी
फिरभीइसनर्मनिगाहीमेंहैंक्यातीरछुपे
तंज़हैतल्ख़ी-ए-दौराँकाइकअफ़्सानाहै
इसमेंहसरतभीशिकायतभीग़म-ए-फ़ुर्क़तभी
दिललरज़जाताहैऔरहोतीहैवहशततारी
मुझकोमहसूसयेहोताहैकिमुजरिममैंहूँ
ऐसालगताहैकितोड़ाहैकिसीकेदिलको
दिलजोमासूमथाबे-लौसथापाकीज़ाथा
क्याकरूँँक्याकरूँँकोईमुदावाभीनहीं
कुछसमझमेंनहींआतायेमुअ'म्माक्याहै
नींदसेउठतेज़राडरसामुझेलगताहै
नीम-बेदारीमेंआतीहैनज़रएकनज़र
आहवोमीठीनज़रतल्ख़नज़रपाकनज़र
तीर-ओ-नश्तरहैंछुपेकितनीहैसफ़्फ़ाकनज़र
यादकुछभीनहींआतामुझेउसकेआगे
हाँकिसीयुगमेंकिसीनेमिरीपूजाकीथी
मैंनेउसकोतोमगरग़ौरसेदेखाभीनहीं
प्यारकीभेंटचढ़ानेकभीआयाथाकोई
मैंनेमुँहफेरलियादेवीथीमैंपत्थरकी
लेकिनइसबातकोकितनेहीजनमबीतगए
फिरभीपीछामिराकरनेसेवोबाज़आया
यूँँहीसदियोंसेहैमेरेहीलिएआवारा
नीम-बेदारीमेंआतीहैनज़रएकनज़र
  - Bano Tahira Sayeed
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