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Banne Miyan Jauhar
aao baccho saamne baitho
aao baccho saamne baitho | आओ बच्चो सामने बैठो
- Banne Miyan Jauhar
आओ
बच्चो
सामने
बैठो
क़िस्सा
एक
सुनाऊँ
तुम
को
जंगल
में
इक
भूक
का
मारा
लकड़ी
लाने
गया
बेचारा
जंगल
में
थी
नद्दी
गहरी
गिर
गई
बेचारे
की
कुल्हाड़ी
क्या
करूँँ
दिल
में
सोच
रहा
था
इतने
में
इक
आदमी
आया
कहने
लगा
क्यूँँ
तुम
हो
फ़सुर्दा
कुछ
तो
बताओ
क्या
है
सदमा
बोला
वो
मैं
क्या
कहूँ
भाई
मैं
ने
कुल्हाड़ी
अपनी
गँवाई
इस
नद्दी
ही
में
वो
पड़ी
है
हालत
मेरी
आह
बुरी
है
नद्दी
में
तब
कूद
गया
वो
कैसा
बहादुर
इंसाँ
था
वो
मिल
गई
नद्दी
में
वो
कुल्हाड़ी
ग़ोता
मारा
और
निकाली
देखा
तो
वो
सोने
की
थी
पूछा
क्या
है
यही
तुम्हारी
बोला
ये
नहीं
मेरी
भाई
डुबकी
उस
ने
और
लगाई
अब
लोहे
की
उस
ने
निकाली
फिर
पूछा
क्या
ये
है
तुम्हारी
देख
के
ये
ख़ुश
हो
गया
उस
को
और
कहा
हाँ
यही
थी
देखो
ले
कर
ख़ुश-ख़ुश
घर
को
सिधारा
कितना
सच्चा
था
बेचारा
देख
के
सोने
की
वो
कुल्हाड़ी
उस
की
निय्यत
ज़रा
न
बदली
जी
में
अगर
लालच
कुछ
होता
सोने
की
हरगिज़
न
वो
खोता
बुरा
है
लालच
सच
है
अच्छा
'जौहर'
का
भी
यही
है
कहना
- Banne Miyan Jauhar
ख़ूँ
पिला
कर
जो
शे'र
पाला
था
उस
ने
सर्कस
में
नौकरी
कर
ली
Fahmi Badayuni
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अजीब
हालत
है
जिस्म-ओ-जाँ
की
हज़ार
पहलू
बदल
रहा
हूँ
वो
मेरे
अंदर
उतर
गया
है
मैं
ख़ुद
से
बाहर
निकल
रहा
हूँ
Azm Shakri
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हालत-ए-हाल
से
बेगाना
बना
रक्खा
है
ख़ुद
को
माज़ी
का
निहाँ-ख़ाना
बना
रक्खा
है
Abbas Qamar
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बी.ए
भी
पास
हों
मिले
बी-बी
भी
दिल-पसंद
मेहनत
की
है
वो
बात
ये
क़िस्मत
की
बात
है
Akbar Allahabadi
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गो
मैं
रहा
रहीन-ए-सितम-हा-ए-रोज़गार
लेकिन
तिरे
ख़याल
से
ग़ाफ़िल
नहीं
रहा
Mirza Ghalib
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ख़ुद
जिसे
मेहनत
मशक़्क़त
से
बनाता
हूँ
'जमाल'
छोड़
देता
हूँ
वो
रस्ता
आम
हो
जाने
के
बाद
Jamal Ehsani
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ये
भी
अच्छा
हुआ
मौत
ने
आकर
हमको
बचा
लिया
वरना
हालत
ऐसी
थी,
हम
शायर
भी
हो
सकते
थे
Bhaskar Shukla
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इसी
लिए
तो
है
ज़िंदाँ
को
जुस्तुजू
मेरी
कि
मुफ़लिसी
को
सिखाई
है
सर-कशी
मैं
ने
Ali Sardar Jafri
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मुझ
को
ख़्वाहिश
है
उसी
शान
की
दिवाली
की
लक्ष्मी
देश
में
उल्फ़त
की
शब-ओ-रोज़
रहे
देश
को
प्यार
से
मेहनत
से
सँवारें
मिल
कर
अहल-ए-भारत
के
दिलों
में
ये
'कँवल'
सोज़
रहे
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Kanval Dibaivi
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मज़दूर
भले
सारी
ही
उम्र
करे
मेहनत
बेटी
की
विदाई
लायक़
पैसे
नहीं
होते
Amaan Pathan
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