kahaan se manzar samet l | कहाँ से मंज़र समेट लाए नज़र कहाँ से उधार माँगे

  - Balraj Bakshi
कहाँसेमंज़रसमेटलाएनज़रकहाँसेउधारमाँगे
रिवायतोंकोमौतआएतोज़िंदगीइंतिशारमाँगे
सफ़रकीयेकैसीवुसअतेंहैंकिरास्ताहैकोईमंज़िल
थकनकाएहसासभीउतरेक़दमक़दमरहगुज़ारमाँगे
तलाशकेबावजूदसचहैकिमेरेहिस्सेमेंकुछआया
किमैंनेख़ुशियाँहज़ारढूँडींकिदर्दमैंनेहज़ारमाँगे
अगरवोदेनाहीचाहताहैतोमंज़िलोंकासुराग़देदे
अगरउसेमाँगनाहीठहरेतोरास्तोंकाग़ुबारमाँगे
कभीअचानकहीघेरलेतेहैंराहमेंना-गुज़ीरलम्हे
कोईकहाँतकपनाहढूँडेकोईकहाँतकफ़रारमाँगे
सज़ाएँतज्वीज़करकेरक्खोयेएकलम्हा-ए-फ़िक्रियाहै
किकोई'बलराज'अपनीमर्ज़ीसेजीनेकाइख़्तियारमाँगे
  - Balraj Bakshi
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