bahs kyun hai kaafir-o-deen-daar ki | बहस क्यूँँ है काफ़िर-ओ-दीं-दार की

  - Bahram ji
बहसक्यूँँहैकाफ़िर-ओ-दीं-दारकी
सबहैक़ुदरतदावर-ए-दव्वारकी
हमसफ़-ए-''क़ालू-बला''मेंक्याथे
कुछनईख़्वाहिशनहींदीदारकी
ढूँढ़करदिलमेंनिकालातुझकोयार
तूनेअबमेहनतमिरीबे-कारकी
शक्ल-ए-गुलमेंजल्वाकरतेहोकभी
गाहसूरतबुलबुल-ए-गुलज़ारकी
आपआतेहोकभीसुब्हा-ब-कफ़
करतेहोख़्वाहिशकभीज़ुन्नारकी
लन-तरानीआपकीमूसासेथी
हरजगहहाजतनहींइंकारकी
ख़ासहैंमक़्तूल-ए-शमशीर-ए-जफ़ा
कुछतोलज़्ज़तहैतिरीतलवारकी
दैर-ओ-काबामेंकलीसामेंफिरे
हरजगहहमनेतलाश-ए-यारकी
सबकीहैतक़दीरतेरेहाथमें
क्याशिकायतमुस्लिमकुफ़्फ़ारकी
हममेंजौहरथेइबादतख़ासके
करदियाइंसाँयेमिट्टीख़्वारकी
महर-ओ-महकोउम्रभरदेखाकिए
थीतमन्नारू-ए-पुर-अनवारकी
और'बहराम'इकलिक्खोग़ज़ल
आपकोक़िल्लतनहींअश'आरकी
  - Bahram ji
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