paan kha kar surma ki tahreer phir kheenchi to kya | पान खा कर सुर्मा की तहरीर फिर खींची तो क्या

  - Bahadur Shah Zafar
पानखाकरसुर्माकीतहरीरफिरखींचीतोक्या
जबमिराख़ूँहोचुकाशमशीरफिरखींचीतोक्या
मुहव्विसजबकिज़रतेरेनसीबोंमेंनहीं
तूनेमेहनतभीपय-ए-इक्सीरफिरखींचीतोक्या
गरखिंचेसीनेसेनावकरूहतूक़ालिबसेखींच
अजलजबखिंचगयावोतीरफिरखींचीतोक्या
खींचताथापाँवमेरापहलेहीज़ंजीरसे
जुनूँतूनेमिरीज़ंजीरफिरखींचीतोक्या
दारहीपरउसनेखींचाजबसर-ए-बाज़ार-इश्क़
लाशभीमेरीपय-ए-तशहीरफिरखींचीतोक्या
खींचअबनालाकोईऐसाकिहोउसकोअसर
तूनेदिलआह-ए-पुर-तासीरफिरखींचीतोक्या
चाहिएउसकातसव्वुरहीसेनक़्शाखींचना
देखकरतस्वीरकोतस्वीरफिरखींचीतोक्या
खींचलेअव्वलहीसेदिलकीइनान-ए-इख़्तियार
तूनेगरआशिक़-ए-दिल-गीरफिरखींचीतोक्या
क्याहुआआगेउठाएगर'ज़फ़र'अहसान-ए-अक़्ल
औरअगरअबमिन्नत-ए-तदबीरफिरखींचीतोक्या
  - Bahadur Shah Zafar
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