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Shubham Upwan
chhoo ke tune ab gulaab kar diya
chhoo ke tune ab gulaab kar diya | छू के तूने अब गुलाब कर दिया
- Shubham Upwan
छू
के
तूने
अब
गुलाब
कर
दिया
तूने
दिल
का
हर
हिसाब
कर
दिया
मैं
नहीं
समझ
किसी
को
आता
था
तूने
चेहरा
अब
किताब
कर
दिया
- Shubham Upwan
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अपनी
हालत
का
ख़ुद
एहसास
नहीं
है
मुझ
को
मैं
ने
औरों
से
सुना
है
कि
परेशान
हूँ
मैं
Aasi Uldani
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वक़्त
अपना
बुरा
चल
रहा
इसलिए
सब
सेे
अच्छी
है
मेरी
घडी
की
समझ
Neeraj Neer
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लाई
है
किस
मक़ाम
पे
ये
ज़िंदगी
मुझे
महसूस
हो
रही
है
ख़ुद
अपनी
कमी
मुझे
Ali Ahmad Jalili
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उसे
महसूस
भी
होने
न
दूँगा
कि
उसके
प्यार
में
मैं
मर
चुका
हूँ
Umesh Maurya
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घर
की
तक़सीम
में
अँगनाई
गँवा
बैठे
हैं
फूल
गुलशन
से
शनासाई
गँवा
बैठे
हैं
बात
आँखों
से
समझ
लेने
का
दावा
मत
कर
हम
इसी
शौक़
में
बीनाई
गँवा
बैठे
हैं
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Abrar Kashif
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इसी
लिए
हमें
एहसास-ए-जुर्म
है
शायद
अभी
हमारी
मोहब्बत
नई
नई
है
ना
Afzal Khan
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समझ
के
आग
लगाना
हमारे
घर
में
तुम
हमारे
घर
के
बराबर
तुम्हारा
भी
घर
है
Hafeez Banarasi
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दर्द
में
शिद्दत-ए-एहसास
नहीं
थी
पहले
ज़िंदगी
राम
का
बन-बास
नहीं
थी
पहले
Shakeel Azmi
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उनके
दुखों
को
शे'र
में
कहना
तो
था
मगर
लड़के
समझ
न
पाएँ
कभी
लड़कियों
का
दुख
Ankit Maurya
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देख
कर
हर
कोई
बेकार
समझ
ले
मुझ
को
अपनी
उल्फ़त
में
गिरफ़्तार
समझ
ले
मुझ
को
बिना
उसके
तिरी
जन्नत
मुझे
मंज़ूर
नहीं
तू
मिरी
मान
गुनहगार
समझ
ले
मुझ
को
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Faiz Ahmad
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दूर
साया
मेरा
मुझ
से
तो
हो
गया
जिसको
पाना
था
लेकिन
वही
खो
गया
आरज़ू
थी
बड़ी
दिल
में
मेरे
तो
पर
जाते
जाते
वो
तो
पेड़
ग़म
बो
गया
कितना
ही
रास्ता
देख
लो
उसका
तो
करता
ही
अब
नहीं
वापसी
जो
गया
राह
में
मुझको
हमराही
इक
वो
मिला
उम्र
भर
वो
उदासी
में
अब
ढो
गया
जब
से
उम्मीद
टूटी
है
मेरी
तो
अब
ख़्वाब
उस
दिन
से
ही
मेरा
तो
सो
गया
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Shubham Upwan
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मैंने
भी
ग़ज़लें
तब
से
तो
गाई
नहीं
जब
से
यादें
तेरी
पास
आई
नहीं
ग़म
न
जाने
की
हिस्से
में
कितना
लिखा
मैंने
क़िस्मत
मोहब्बत
की
पाई
नहीं
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Shubham Upwan
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दोस्ती
में
मोहब्बत
को
लाने
लगे
ख़्वाब
हम
तेरे
अब
तो
सजाने
लगे
तेरी
यादों
का
सैलाब
छाया
है
अब
सच
में
हम
तो
मोहब्बत
को
गाने
लगे
है
नहीं
कुछ
भी
अच्छा
मगर
यार
अब
तेरी
हाँ
से
तो
दीपक
जलाने
लगे
ग़ज़लें
सुनता
रहा
रात
भर
सोच
कर
तुझको
पाने
में
मुझको
ज़माने
लगे
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Shubham Upwan
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जैसा
सोचा
तुमने
मैं
वैसा
नहीं
हूँ
पर
बदल
जाऊँ
वो
मैं
चेहरा
नहीं
हूँ
अब
ज़माने
से
मैं
रहता
हूँ
दुखी
पर
मसअला
यह
है
कि
मैं
लगता
नहीं
हूँ
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Shubham Upwan
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मैं
मोहब्बत
के
सिवा
कुछ
और
करता
ही
नहीं
दिल
से
मैं
अब
तो
किसी
के
भी
उतरता
ही
नहीं
ज़िंदगी
के
बारे
में
इतना
मैं
क्यूँँ
सोचूँ
भला
वो
मोहब्बत
मैं
मुझे
खोने
से
डरता
ही
नहीं
बेअसर
हो
जाती
है
अब
ज़िंदगी
से
ही
दु'आ
ज़िंदगी
में
रंग
अब
कोई
भी
भरता
ही
नहीं
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Shubham Upwan
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