zehan aur dil men jo rahtii hai chubhan khul jaa.e | ज़ेहन और दिल में जो रहती है चुभन खुल जाए

  - Badr Wasti
ज़ेहनऔरदिलमेंजोरहतीहैचुभनखुलजाए
आएकाग़ज़पेतोसलमा-ए-सुख़नखुलजाए
क़तरा-ए-दीदा-ए-नमनाकमसीहाईकरे
फ़िक्रकेबंददरीचोंकीशिकनखुलजाए
मैंउसेरोज़मनाताहूँसहरहोनेतक
मेरेअल्लाहकिसीशबतोयेदुल्हनखुलजाए
एकख़ुश्बूसीहैजोरूहकीगहराईमें
लफ़्ज़मिलजाएँतोमा'नीकाचमनखुलजाए
इसतरहजागेकिसीरोज़ग़ज़लकाजादू
जैसेमस्तीमेंपियासेकोईजोगनखुलजाए
नीम-शबइज्ज़-ओ-समाजतसेकरूँँदस्तदराज़
लफ़्ज़धोनेकेलिएआँखोंमेंसावनखुलजाए
सर-कशीऔरतजावुज़सेबचानायारब
मेरेएहसासमेंगरयासकाफनखुलजाए
  - Badr Wasti
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy