jitna teraa hukm tha utni sanwaari zindagi | जितना तेरा हुक्म था उतनी सँवारी ज़िंदगी

  - Azm Shakri
जितनातेराहुक्मथाउतनीसँवारीज़िंदगी
अपनीमर्ज़ीसेकहाँहमनेगुज़ारीज़िंदगी
मेरेअंदरइकनयाग़मरोज़रखजाताहैकौन
रफ़्तारफ़्ताहोरहीहैऔरभारीज़िंदगी
रूहकीतस्कीनकेसारेदरीचेखुलगए
दर्दकेपहलूमेंजबआईहमारीज़िंदगी
सिर्फ़थीख़ाना-बदोशीयामोहब्बतकाजुनूँ
हिजरतेंकरतारहाइकशख़्ससारीज़िंदगी
एकलफ़्ज़-ए-कुनकहाआबादसन्नाटेहुए
आसमानोंसेज़मीनोंपरउतारीज़िंदगी
  - Azm Shakri
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