मैं उम्र के रस्ते में चुप-चाप बिखर जाता

  - Azm Bahzad
मैंउम्रकेरस्तेमेंचुप-चापबिखरजाता
इकदिनभीअगरअपनीतन्हाईसेडरजाता
मैंतर्क-ए-त'अल्लुक़परज़िंदाहूँसोमुजरिमहूँ
काशउसकेलिएजीताअपनेलिएमरजाता
उसरातकोईख़ुश्बूक़ुर्बतमेंनहींजागी
मैंवर्नासँवरजाताऔरवोभीनिखरजाता
उसजान-ए-तकल्लुमकोतुममुझसेतोमिलवाते
तस्ख़ीरकरपाताहैरानतोकरजाता
कलसामनेमंज़िलथीपीछेमिरीआवाज़ें
चलतातोबिछड़जातारुकतातोसफ़रजाता
मैंशहरकीरौनक़मेंगुमहोकेबहुतख़ुशथा
इकशामबचालेताइकरोज़तोघरजाता
महरूमफ़ज़ाओंमेंमायूसनज़ारोंमें
तुम'अज़्म'नहींठहरेमैंकैसेठहरजाता
  - Azm Bahzad
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