जो बात शर्त-ए-विसाल ठहरी वही है अब वज्ह-ए-बद-गुमानी

  - Azm Bahzad
जोबातशर्त-ए-विसालठहरीवहीहैअबवज्ह-ए-बद-गुमानी
इधरहैइसबातपरख़मोशीउधरहैपहलीसेबे-ज़बानी
किसीसितारेसेक्याशिकायतकिरातसबकुछबुझाहुआथा
फ़सुर्दगीलिखरहीथीदिलपरशिकस्तगीकीनईकहानी
अजीबआशोब-वज़्अ'-दारीहमारेआ'साबपरहैतारी
लबोंपेतरतीब-ए-ख़ुश-कलामीदिलोंमेंतंज़ीम-ए-नौहा-ख़्वानी
हमारेलहजेमेंयेतवाज़ुनबड़ीसऊबतकेबा'दआया
कईमिज़ाजोंकेदश्तदेखेकईरवय्योंकीख़ाकछानी
  - Azm Bahzad
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