tiri samt jaane ka raasta nahin ho raha | तिरी सम्त जाने का रास्ता नहीं हो रहा

  - Azhar Iqbal
तिरीसम्तजानेकारास्तानहींहोरहा
रह-ए-इश्क़मेंकोईमो'जिज़ानहींहोरहा
कोईआइनाहोजोख़ुदसेमुझकोमिलासके
मिराअपने-आपसेसामनानहींहोरहा
तूख़ुदा-ए-हुस्न-ओ-जमालहैतोहुआकरे
तेरीबंदगीसेमिराभलानहींहोरहा
कोईरातकेठहरगईमिरीज़ातमें
मिरारौशनीसेभीराब्तानहींहोरहा
उसेअपनेहोंटोंकालम्सदोकियेसाँसले
येजोपेड़हैयेहरा-भरानहींहोरहा
  - Azhar Iqbal
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