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Azbar Safeer
roz ik jheel raah takti hai kheench leta hai ek alaav mujhe
roz ik jheel raah takti hai kheench leta hai ek alaav mujhe | रोज़ इक झील राह तकती है खींच लेता है एक अलाव मुझे
- Azbar Safeer
रोज़
इक
झील
राह
तकती
है
खींच
लेता
है
एक
अलाव
मुझे
जन्नती
हूँ
तो
फिर
बढ़ो
आगे
तितलियों
आओ
गुदगुदाओ
मुझे
- Azbar Safeer
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काम
की
बात
मैंने
की
ही
नहीं
ये
मेरा
तौर-ए-ज़िंदगी
ही
नहीं
Jaun Elia
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कभी
किसी
न
किसी
राह
पर
मिलेंगे
फिर
हम
एक
से
ही
ख़यालात
पेश
करते
हुए
shaan manral
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तिरे
सिवा
भी
कहीं
थी
पनाह
भूल
गए
निकल
के
हम
तिरी
महफ़िल
से
राह
भूल
गए
Majrooh Sultanpuri
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सच
बोलने
के
तौर-तरीक़े
नहीं
रहे
पत्थर
बहुत
हैं
शहर
में
शीशे
नहीं
रहे
Nawaz Deobandi
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उसूली
तौर
पे
मर
जाना
चाहिए
था
मगर
मुझे
सुकून
मिला
है
तुझे
जुदा
कर
के
Ali Zaryoun
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उसे
अभी
भी
मेरे
दिल
के
हाल
का
नहीं
पता
तो
यानी
उसको
अपने
घर
का
रास्ता
नहीं
पता
ये
तेरी
भूल
है
ऐ
मेरे
ख़ुश-ख़याल
के
मुझे
पराई
औरतों
से
तेरा
राब्ता
नहीं
पता
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Ruqayyah Maalik
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ज़रा
सी
देर
को
सकते
में
आ
गए
थे
हम
कि
एक
दूजे
के
रस्ते
में
आ
गए
थे
हम
जो
अपना
हिस्सा
भी
औरों
में
बाँट
देता
है
एक
ऐसे
शख़्स
के
हिस्से
में
आ
गए
थे
हम
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Ismail Raaz
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दीवार
क्या
गिरी
मिरे
ख़स्ता
मकान
की
लोगों
ने
मेरे
सेहन
में
रस्ते
बना
लिए
Sibt Ali Saba
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मेरी
दुनिया
उजड़
गई
इस
में
तुम
इसे
हादसा
समझते
हो
आख़िरी
रास्ता
तो
बाक़ी
है
आख़िरी
रास्ता
समझते
हो
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Himanshi babra KATIB
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भूल
जोते
हैं
मुसाफ़िर
रस्ता
लोग
कहते
हैं
कहानी
फिर
भी
Ambreen Haseeb Ambar
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दुख
की
दीमक
अगर
नहीं
लगती
ज़िन्दगी
किस
क़द्र
हसीं
लगती
वस्ल
को
लॉटरी
समझता
हूँ
लॉटरी
रोज़
तो
नहीं
लगती
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Azbar Safeer
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शदीद
ज़हनी
दबाव
को
कम
किया
जाए
ये
सोचना
है
कि
अब
किसका
ग़म
किया
जाए
हम
अपनी
वहशते
टीलों
को
सौंप
देंगे
मगर
तुम्हारा
हुस्न
भी
सहरा
में
ज़म
किया
जाए
वो
शोख
ज़िस्म
निगाहों
पे
खुल
नहीं
रहा
है
ख़ुदाए
हुस्ने
ज़माना
करम
किया
जाए
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Azbar Safeer
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चमेली
रात
कह
रही
थी
मेरी
बू
लिया
करें
और
इस
सेे
जी
नहीं
भरे
तो
मुझको
छू
लिया
करें
कभी
भी
अच्छे
देवता
नहीं
बनेंगे
ऐसे
आप
चढ़ावे
में
रुपए
नहीं
फ़क़त
लहू
लिया
करें
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Azbar Safeer
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बिछड़े
तो
रख
रखाव
भी
करना
नहीं
पड़ा
ताज़ा
किसी
को
घाव
भी
करना
नहीं
पड़ा
बस
देख
कर
ही
उसको
परिंदे
उतर
गए
उसको
तो
आओ
आओ
भी
करना
नहीं
पड़ा
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Azbar Safeer
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लोग
आए
ही
नहीं
मुझको
मुयस्सर
ऐसे
जो
मुझे
कहते
कि
ऐसे
नहीं
अज़बर
ऐसे
तेज़
दौड़ा
के
अचानक
मेरी
रस्सी
खींची
उसने
समझाया
मुझे
लगती
है
ठोकर
ऐसे
कोई
तो
होता
जो
सीने
से
लगा
कर
कहता
बात
थी
बात
को
लेते
नहीं
दिल
पर
ऐसे
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Azbar Safeer
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