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Azbar Safeer
log aa.e hi nahin mujhko muyassar aise
log aa.e hi nahin mujhko muyassar aise | लोग आए ही नहीं मुझको मुयस्सर ऐसे
- Azbar Safeer
लोग
आए
ही
नहीं
मुझको
मुयस्सर
ऐसे
जो
मुझे
कहते
कि
ऐसे
नहीं
अज़बर
ऐसे
तेज़
दौड़ा
के
अचानक
मेरी
रस्सी
खींची
उसने
समझाया
मुझे
लगती
है
ठोकर
ऐसे
कोई
तो
होता
जो
सीने
से
लगा
कर
कहता
बात
थी
बात
को
लेते
नहीं
दिल
पर
ऐसे
- Azbar Safeer
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हर
धड़कते
पत्थर
को
लोग
दिल
समझते
हैं
'उम्रें
बीत
जाती
हैं
दिल
को
दिल
बनाने
में
Bashir Badr
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आज
है
उनको
आना,
मज़ा
आएगा
फिर
जलेगा
ज़माना,
मज़ा
आएगा
तीर
उनकी
नज़र
के
चलेंगे
कई
दिल
बनेगा
निशाना
मज़ा
आएगा
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Bhaskar Shukla
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दिल
में
और
दुनिया
में
अब
नहीं
मिलेंगे
हम
वक़्त
के
हमेशा
में
अब
नहीं
मिलेंगे
हम
Jaun Elia
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उस
के
दिल
की
आग
ठंडी
पड़
गई
मुझ
को
शोहरत
मिल
गई
इल्ज़ाम
से
Siraj Faisal Khan
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जितने
भी
हैं
ज़ख़्म
तुम्हारे
सिल
देगी
होटल
में
खाने
का
आधा
बिल
देगी
सीधे
मुँह
जो
बात
नहीं
करती
है
जो
तुमको
लगता
है
वो
लड़की
दिल
देगी
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Shadab Asghar
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जब
ज़रा
रात
हुई
और
मह
ओ
अंजुम
आए
बार-हा
दिल
ने
ये
महसूस
किया
तुम
आए
Asad Bhopali
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मैं
जब
सो
जाऊँ
इन
आँखों
पे
अपने
होंट
रख
देना
यक़ीं
आ
जाएगा
पलकों
तले
भी
दिल
धड़कता
है
Bashir Badr
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मसअला
फिर
वही
बे-घर
हुए
लोगों
का
है
हम
सभी
दिल
से
निकाले
कहाँ
तक
जाएँगे
Neeraj Neer
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हम
तो
कुछ
देर
हँस
भी
लेते
हैं
दिल
हमेशा
उदास
रहता
है
Bashir Badr
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इतनी
सारी
यादों
के
होते
भी
जब
दिल
में
वीरानी
होती
है
तो
हैरानी
होती
है
Afzal Khan
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दुख
की
दीमक
अगर
नहीं
लगती
ज़िन्दगी
किस
क़द्र
हसीं
लगती
वस्ल
को
लॉटरी
समझता
हूँ
लॉटरी
रोज़
तो
नहीं
लगती
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Azbar Safeer
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रोज़
इक
झील
राह
तकती
है
खींच
लेता
है
एक
अलाव
मुझे
जन्नती
हूँ
तो
फिर
बढ़ो
आगे
तितलियों
आओ
गुदगुदाओ
मुझे
Azbar Safeer
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पहले
कहता
है
जुनूँ
उसका
गिरेबान
पकड़
फिर
मेरा
दिल
मुझे
कहता
है
इधर
कान
पकड़
ऐसी
वहशत
भी
न
हो
घर
के
दरो
बाम
कहें
कोई
आवाज़
ही
ले
आ
कोई
मेहमान
पकड़
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Azbar Safeer
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चमेली
रात
कह
रही
थी
मेरी
बू
लिया
करें
और
इस
सेे
जी
नहीं
भरे
तो
मुझको
छू
लिया
करें
कभी
भी
अच्छे
देवता
नहीं
बनेंगे
ऐसे
आप
चढ़ावे
में
रुपए
नहीं
फ़क़त
लहू
लिया
करें
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Azbar Safeer
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शदीद
ज़हनी
दबाव
को
कम
किया
जाए
ये
सोचना
है
कि
अब
किसका
ग़म
किया
जाए
हम
अपनी
वहशते
टीलों
को
सौंप
देंगे
मगर
तुम्हारा
हुस्न
भी
सहरा
में
ज़म
किया
जाए
वो
शोख
ज़िस्म
निगाहों
पे
खुल
नहीं
रहा
है
ख़ुदाए
हुस्ने
ज़माना
करम
किया
जाए
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Azbar Safeer
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