जिनरस्तोंसेबचकेचलनाचाहूँमैं
जाने-अनजानेउनपेआजाऊँमैं
देखरहाहूँतुमतकजातेरस्तोंको
सोचरहाहूँतुमतककैसेआऊँमैं?
कितनीमुद्दत-बादमिलीहोतुममुझसेे
तुमसेपूछूँयातुमकोबतलाऊँमैं?
मैंख़ालिक़हूँक़दम-क़दमपेमंज़िलका
भटकेरस्तोंकोमंज़िलतकलाऊँमैं
तूमुझमेंमुझसेभीज़्यादाशामिलहै
तेरीऐसीबातोंपेइठलाऊँमैं
मेरीआँखोंमेंआँखोंकोडालज़रा
आतेराचहरातुझकोदिखलाऊँमैं
जोमेरीउल्फ़तकेक़ाबिलहो“जस्सर”
तुझसाकोईऔरकहाँसेलाऊँमैं