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Avtar Singh Jasser
umr bhar is husn ke gulzaar men khoya rahoon
umr bhar is husn ke gulzaar men khoya rahoon | उम्र भर इस हुस्न के गुलज़ार में खोया रहूँ
- Avtar Singh Jasser
उम्र
भर
इस
हुस्न
के
गुलज़ार
में
खोया
रहूँ
मैं
हमेशा
आपके
दीदार
में
खोया
रहूँ
- Avtar Singh Jasser
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उम्र
जो
बे-ख़ुदी
में
गुज़री
है
बस
वही
आगही
में
गुज़री
है
Gulzar Dehlvi
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उम्र
का
एक
और
साल
गया
वक़्त
फिर
हम
पे
ख़ाक
डाल
गया
Shakeel Jamali
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सुब्ह
होती
है
शाम
होती
है
उम्र
यूँँही
तमाम
होती
है
Munshi Amirullah Tasleem
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वो
जो
गीत
तुम
ने
सुना
नहीं
मेरी
उम्र
भर
का
रियाज़
था
मेरे
दर्द
की
थी
वो
दास्ताँ
जिसे
तुम
हँसी
में
उड़ा
गए
Amjad Islam Amjad
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एक
दिन
देखने
को
आ
जाते
ये
हवस
उम्र
भर
नहीं
होती
Ibn E Insha
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खिलाड़ी
देवकीनंदन
के
जैसा
सामने
हो
तो
तजुर्बा
लाख
हो
शकुनी
भी
चौसर
हार
जाते
हैं
shashwat singh darpan
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उम्र
कम
पड़
जायेगी
हर
ख़्वाब
गर
पूरा
हुआ
और
गर
पूरा
न
हो
तो
काटती
है
ज़िंदगी
Ajeetendra Aazi Tamaam
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अब
तो
ख़ुद
अपने
ख़ून
ने
भी
साफ़
कह
दिया
मैं
आपका
रहूॅंगा
मगर
उम्र
भर
नहीं
Aalok Shrivastav
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मिल
गए
थे
एक
बार
उस
के
जो
मेरे
लब
से
लब
उम्र
भर
होंटों
पे
अपने
मैं
ज़बाँ
फेरा
किया
Jurat Qalandar Bakhsh
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क्या
हुआ
जो
मुझे
हम-उम्र
मोहब्बत
न
मिली
मेरी
ख़्वाहिश
भी
यही
थी
कि
बड़ी
आग
लगे
Muzdum Khan
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आज
ज़ाहिद
को
यूँँ
मय-कदा
याद
आया
जिस
तरह
काफ़िरों
को
ख़ुदा
याद
आया
Avtar Singh Jasser
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इस
ज़माने
में
नहीं
अगले
ज़माने
में
सही
मैं
तुझे
अपना
बनाऊँगा
मेरा
वा'दा
रहा
Avtar Singh Jasser
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तुझ
से
दूर
हुआ
तो
यह
मालूम
हुआ
ख़ुद
से
कितना
दूर
निकल
आया
था
मैं
Avtar Singh Jasser
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तुम
जो
निकले
बे-वफ़ा
इस
का
गिला
अपनी
जगह
और
जो
तुम
से
मिला
ये
तजरबा
अपनी
जगह
Avtar Singh Jasser
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इश्क़
क़ातिल
हुआ
है
जिस-तिस
का
कोई
अपना
नहीं
हुआ
इस
का
फिर
रहा
है
वो
दर-ब-दर
तन्हा
इश्क़
कामिल
नहीं
हुआ
जिस
का
उम्र
की
तेज़
धूप
में
देखो
हुस्न
ढलने
लगा
है
नरगिस
का
वक़्त
का
इंतिज़ार
सब
को
है
वक़्त
लेकिन
है
मुन्तजि़र
किस
का
गर
जहाँ
में
ख़ुदा
न
होता
तो
आशना
कौन
होता
मुफ़लिस
का
हर
सफ़र
में
उसे
मिली
मंज़िल
रहनुमा
है
ख़ुदा
यहाँ
जिस
का
मौत
तो
आ
गई
मुझे
कब
की
मैं
अभी
भी
हूँ
मुंतज़िर
किस
का
अश्क
बरसे
थे
रात
भर
“जस्सर”
अब्र
यादों
का
दिल
में
था
खिसका
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Avtar Singh Jasser
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