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Avtar Singh Jasser
phir milenge aap se gar zindagi baaki rahi
phir milenge aap se gar zindagi baaki rahi | फिर मिलेंगे आप से गर ज़िंदगी बाक़ी रही
- Avtar Singh Jasser
फिर
मिलेंगे
आप
से
गर
ज़िंदगी
बाक़ी
रही
बात
यह
उस
ने
जुदा
होते
हुए
मुझ
से
कही
- Avtar Singh Jasser
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आज
भी
शायद
कोई
फूलों
का
तोहफ़ा
भेज
दे
तितलियाँ
मंडला
रही
हैं
काँच
के
गुल-दान
पर
Shakeb Jalali
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ग़ुबार-ए-वक़्त
में
अब
किस
को
खो
रही
हूँ
मैं
ये
बारिशों
का
है
मौसम
कि
रो
रही
हूँ
मैं
Shahnaz Parveen Sahar
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अभी
से
पाँव
के
छाले
न
देखो
अभी
यारो
सफ़र
की
इब्तिदा
है
Ejaz Rahmani
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दिल
की
तमन्ना
थी
मस्ती
में
मंज़िल
से
भी
दूर
निकलते
अपना
भी
कोई
साथी
होता
हम
भी
बहकते
चलते
चलते
Majrooh Sultanpuri
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मुसाफ़िरों
के
दिमाग़ों
में
डर
ज़ियादा
है
न
जाने
वक़्त
है
कम
या
सफ़र
ज़ियादा
है
Hashim Raza Jalalpuri
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बर्बाद
कर
दिया
हमें
परदेस
ने
मगर
माँ
सब
से
कह
रही
है
कि
बेटा
मज़े
में
है
Munawwar Rana
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इश्क़
अगर
बढ़ता
है
तो
फिर
झगड़े
भी
तो
बढ़ते
हैं
आमदनी
जब
बढ़ती
है
तो
ख़र्चे
भी
तो
बढ़ते
हैं
माना
मंज़िल
नहीं
मिली
है
हमको
लेकिन
रोज़ाना
एक
क़दम
उसकी
जानिब
हम
आगे
भी
तो
बढ़ते
हैं
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Tanoj Dadhich
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सुखाई
जा
रही
है
जुल्फ़
धोकर
घटा
या'नी
निचोड़ी
जा
रही
है
Satya Prakash Soni
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निगाहें
फेर
ली
घबरा
के
मैंने
वो
तुम
से
ख़ूब-सूरत
लग
रही
थी
Fahmi Badayuni
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न
जाने
कैसी
महक
आ
रही
है
बस्ती
से
वही
जो
दूध
उबलने
के
बाद
आती
है
Munawwar Rana
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विरासत
में
मिली
तहज़ीब
का
यूँँ
मान
रखता
हूँ
मैं
मज़हब
से
ज़ियादा
दिल
में
हिन्दुस्तान
रखता
हूँ
मुहब्बत
और
नफ़रत
जो
भी
चाहोगे
मिलेगा
वो
चिराग़ों
की
हिफ़ाज़त
में
कई
तूफ़ान
रखता
हूँ
पनपती
साजिशें
हैं
जिस
में
अपनों
के
लिए
अक्सर
मैं
वो
कुंज-ए-जिगर
“जस्सर”
सदा
वीरान
रखता
हूँ
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Avtar Singh Jasser
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मेरे
तो
ज़्हन-ओ-दिल
को
बस
यही
ग़म
खा
रहा
है
कोई
मुझ
से
भी
ज़्यादा
पास
तेरे
आ
रहा
है
कुछ
इस
दरजा
तुझे
नज़दीक
से
जाना
है
मैने
कि
अब
"जस्सर",
तेरी
निस्बत
से
दिल
उकता
रहा
है
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Avtar Singh Jasser
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मुझे
तुम
से
ज़रा
सी
भी
शिकायत
अब
नहीं
होगी
अगर
तुम
लौट
भी
आए
मुहब्बत
अब
नहीं
होगी
मुझे
बर्बाद
करने
को
है
तेरा
इश्क़
ही
काफ़ी
मुझे
ग़ैरों
की
नफ़रत
की
ज़रूरत
अब
नहीं
होगी
त'अल्लुक़
टूटने
से
गर
नहीं
तुम
को
गिला
"जस्सर"
इधर
से
भी
मुहब्बत
की
हिफ़ाज़त
अब
नहीं
होगी
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Avtar Singh Jasser
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निशाँ
मिटता
नहीं
"जस्सर"
तुम्हारा
कोई
पत्थर
है
शायद
दिल
हमारा
Avtar Singh Jasser
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कई
रिश्ते
यक़ीं
के
दम
पे
दम
भरते
हैं
दुनिया
में
मगर
कुछ
तो
ग़लत
फ़हमी
में
ही
दम
तोड़
देते
हैं
बड़ा
हैरान
हूँ
मैं,
तुम
अभी
तक
साथ
हो
'जस्सर'
वगरना
लोग
मेरा
साथ
जल्दी
छोड़
देते
हैं
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Avtar Singh Jasser
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