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Saroj Kumar
mere paas koi kahaanii nahin hai
mere paas koi kahaanii nahin hai | मेरे पास कोई कहानी नहीं है
- Saroj Kumar
मेरे
पास
कोई
कहानी
नहीं
है
तेरे
बाद
तो
ज़िंदगानी
नहीं
है
कोई
तो
बताओ
ये
मंज़र
है
कैसा
ये
महफ़िल
तो
इतनी
पुरानी
नहीं
है
पता
कोई
मुझ
सेे
न
मोहन
का
पूछो
यहाँ
कोई
मीरा
दिवानी
नहीं
है
मेरे
जैसा
कोई
दिवाना
नहीं
है
तेरे
जैसी
कोई
दिवानी
नहीं
है
- Saroj Kumar
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तिरे
बग़ैर
अजब
बज़्म-ए-दिल
का
आलम
है
चराग़
सैंकड़ों
जलते
हैं
रौशनी
कम
है
Shakeel Badayuni
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मैं
ढूँढ़
रहा
हूँ
मिरी
वो
शम्अ
कहाँ
है
जो
बज़्म
की
हर
चीज़
को
परवाना
बना
दे
Behzad Lakhnavi
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प्यास
जहाँ
की
एक
बयाबाँ
तेरी
सख़ावत
शबनम
है
पी
के
उठा
जो
बज़्म
से
तेरी
और
भी
तिश्ना-काम
उठा
Ali Sardar Jafri
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महफ़िल
में
तेरी
यूँँ
ही
रहे
जश्न-ए-चरागाँ
आँखों
में
ही
ये
रात
गुज़र
जाए
तो
अच्छा
Sahir Ludhianvi
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गले
मिली
कभी
उर्दू
जहाँ
पे
हिन्दी
से
मिरे
मिज़ाज
में
उस
अंजुमन
की
ख़ुशबू
है
Satish Shukla Raqeeb
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न
जाने
कब
से
इक
मतला
लिए
बैठा
हूँ
महफ़िल
में
तुम्हारा
ज़िक्र
कर
दे
कोई
तो
पूरी
ग़ज़ल
कर
लूँ
Harsh saxena
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तुम्हें
हम
भी
सताने
पर
उतर
आएँ
तो
क्या
होगा
तुम्हारा
दिल
दुखाने
पर
उतर
आएँ
तो
क्या
होगा
हमें
बदनाम
करते
फिर
रहे
हो
अपनी
महफ़िल
में
अगर
हम
सच
बताने
पर
उतर
आएँ
तो
क्या
होगा
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Santosh S Singh
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दूर
हूँ
लेकिन
बता
सकता
हूँ
उन
की
बज़्म
में
क्या
हुआ
क्या
हो
रहा
है
और
क्या
होने
को
है
Shakeel Badayuni
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कम
अज़
कम
इक
ज़माना
चाहता
हूँ
कि
तुम
को
भूल
जाना
चाहता
हूँ
ख़ुदारा
मुझ
को
तन्हा
छोड़
दीजे
मैं
खुल
कर
मुस्कुराना
चाहता
हूँ
सरासर
आप
हूँ
मद्दे
मुक़ाबिल
ख़ुदी
ख़ुद
को
हराना
चाहता
हूँ
मेरे
हक़
में
उरूस-ए-शब
है
मक़्तल
सो
उस
से
लब
मिलाना
चाहता
हूँ
ये
आलम
है,
कि
अपने
ही
लहू
में
सरासर
डूब
जाना
चाहता
हूँ
सुना
है
तोड़ते
हो
दिल
सभों
का
सो
तुम
से
दिल
लगाना
चाहता
हूँ
उसी
बज़्म-ए-तरब
की
आरज़ू
है
वही
मंज़र
पुराना
चाहता
हूँ
नज़र
से
तीर
फैंको
हो,
सो
मैं
भी
जिगर
पर
तीर
खाना
चाहता
हूँ
चराग़ों
को
पयाम-ए-ख़ामुशी
दे
तेरे
नज़दीक
आना
चाहता
हूँ
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Kazim Rizvi
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ज़ेहन
से
यादों
के
लश्कर
जा
चुके
वो
मेरी
महफ़िल
से
उठ
कर
जा
चुके
मेरा
दिल
भी
जैसे
पाकिस्तान
है
सब
हुकूमत
करके
बाहर
जा
चुके
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Tehzeeb Hafi
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मैं
अपने
राह
की
बाधा
समझ
ठुकरा
दिया
जिसको
नहीं
मालूम
था
मुझको
वो
पत्थर
देवता
होगा
Saroj Kumar
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जिसे
अपना
समझ
बैठा
वही
मुझको
सताता
है
किया
बर्बाद
मुझको
पर
तुम्हारा
क्या
ही
जाता
है
कभी
मत
सोचना
ये
तुम
रहोगे
चैन
से
छोरी
क़लम
हाथों
में
है
मेरे
मुझे
लिखना
भी
आता
है
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Saroj Kumar
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बैठे
बैठे
जब
भी
तुमको
सोचता
हूँ
आज
कल
मन
में
इक
तस्वीर
तेरी
खींचता
हूँ
आज
कल
Saroj Kumar
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जैसी
आँखें
वैसी
दुनिया
नहीं
नहीं
जैसी
दुनिया
वैसी
आँखें
रखता
हूँ
Saroj Kumar
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इतनी
शिद्दत
से
तुम्हें
जो
देखता
रहता
हूँ
मैं
आइने
को
लगता
है
मैं
बे-वफ़ा
हूँ
आज
कल
Saroj Kumar
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