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Abdulla Asif
chhod puraani baatein warna
chhod puraani baatein warna | छोड़ पुरानी बातें वर्ना
- Abdulla Asif
छोड़
पुरानी
बातें
वर्ना
हम
दोनों
शर्मिंदा
होंगे
- Abdulla Asif
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फ़ातिहा
पढ़
कि
फूल
रख
मुझ
पर
आ
गया
है
तो
कुछ
जता
अफ़सोस
Siraj Faisal Khan
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दूसरा
मौक़ा
तो
ख़ुद
को
भी
नहीं
देते
हम
और
वो
रोते
हुए
कह
रही
सॉरी
बाबू
Rachit Sonkar
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दुश्मनी
जम
कर
करो
लेकिन
ये
गुंजाइश
रहे
जब
कभी
हम
दोस्त
हो
जाएँ
तो
शर्मिंदा
न
हों
Bashir Badr
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ये
मयख़ाने
में
बैठ
अफ़सोस
अब
क्यूँ
तेरे
हिस्से
भी
तो
जवानी
लिखी
थी
Amaan Pathan
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बोसाँ
लबाँ
सीं
देने
कहा
कह
के
फिर
गया
प्याला
भरा
शराब
का
अफ़्सोस
गिर
गया
Abroo Shah Mubarak
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मुझे
भी
अपनी
क़िस्मत
पर
हमेशा
नाज़
रहता
है
सुना
है
ख़्वाहिशें
उनकी
भी
शर्मिंदा
नहीं
रहती
सुना
है
वो
भी
अब
तक
खाए
बैठी
हैं
कई
शौहर
बहुत
दिन
तक
मेरी
भी
बीवियाँ
ज़िंदा
नहीं
रहती
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Paplu Lucknawi
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उम्र
भर
साँप
से
शर्मिंदा
रहे
ये
सुन
कर
जब
से
इंसान
को
काटा
है
तो
फन
दुखता
है
Munawwar Rana
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मुझे
बातें
नहीं
तेरी
मोहब्बत
चाहिए
थी
मुझे
अफ़सोस
है
ये
मुझको
कहना
पड़
रहा
है
Ali Zaryoun
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हम
चाहते
थे
मौत
ही
हम
को
जुदा
करे
अफ़्सोस
अपना
साथ
वहाँ
तक
नहीं
हुआ
Waseem Nadir
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अफ़सोस
हो
रहा
है
तेरी
शक्ल
देख
कर
क्या
कोई
तेरा
चाहने
वाला
नहीं
रहा
Abbas Tabish
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ज़िन्दगी
मेरी
नज़रों
से
तू
गिर
चुकी
और
मैं
भी
गिरी
चीज़
रखता
नहीं
Abdulla Asif
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जन्नत
से
तो
वैसे
भी
त'अल्लुक़
नहीं
कोई
अल्लाह
जहन्नम
को
मेरे
शर
से
बचाए
Abdulla Asif
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काफ़ी
ऊपर
निकल
गया
हूँ
मैं
और
अंजाम
जानता
हूँ
मैं
इक
तवाइफ़
हूँ
दिल
के
कोठे
पर
पेश-ए-उम्मीद
नाचता
हूँ
मैं
आँधियों
लौट
जाओ
दिखता
नहीं
सर-ए-क़िन्दील
मैं
खड़ा
हूँ
मैं
हर
कोई
मुझ
सेे
डरता
फिरता
है
ऐसा
लगता
है
आइना
हूँ
मैं
कुछ
ख़ुदा
चाक
पर
रखे
हुए
हैं
और
उन्हें
नक़्श
दे
रहा
हूँ
मैं
सब
तरफ़दार
कशमकश
में
हैं
जबसे
अपना
अदू
बना
हूँ
मैं
ठीक
है
तुम
वफ़ा
की
मूरत
हो
मान
लेता
हूँ
बे-वफ़ा
हूँ
मैं
एक
पहुँचा
हुआ
क़लंदर
हूँ
पारसाई
छुपा
रहा
हूँ
मैं
जो
हुआ
भी
नहीं
अभी
'आसिफ़'
जाने
क्यूँ
उस
सेे
डर
रहा
हूँ
मैं
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Abdulla Asif
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कोई
संसार
में
उसके
जैसा
नहीं
होगा
भी
पर
मुझे
सिर्फ़
दिखता
नहीं
बस
न्यूटन
जी
की
आबरू
के
लिए
उड़
तो
सकता
हूँ
लेकिन
मैं
उड़ता
नहीं
ज़िन्दगी
मेरी
नज़रों
से
तू
गिर
चुकी
और
मैं
भी
गिरी
चीज़
रखता
नहीं
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Abdulla Asif
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दो
चार
लोग
घर
के
अगर
मेरे
छोड़
दो
बाक़ी
किसी
की
आँख
में
जँचता
नहीं
हूँ
मैं
कब
से
हूँ
मुंतज़िर
वो
मेरा
हाल
पूछ
लें
और
मुस्कुरा
के
मैं
कहूँ
अच्छा
नहीं
हूँ
मैं
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Abdulla Asif
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