teri aankhoñ ke hote hue may kashi mujhse hoti nahin | तेरी आँखों के होते हुए मय कशी मुझ सेे होती नहीं

  - Abdulla Asif
तेरीआँखोंकेहोतेहुएमयकशीमुझसेेहोतीनहीं
तुमरहोसामनेबातफिरहोशकीमुझसेेहोतीनहीं
ज़िंदगीख़ुदकोतेरातरफ़दारकबतकरखूॅंमैंयहाँ
चारदिनहोगएअबतेरीपैरवीमुझसेेहोतीनहीं
तेरीयादोंकायेमारकाज़ेहनसेहैमेरेऔरक्या
हारजाऊँभलेजंगपरमुल्तवीमुझसेेहोतीनहीं
पासहोतानहींहैतोमैंकरताहूँआरज़ूवस्लकी
वोक़रीबआएतोख़ुदाबातभीमुझसेेहोतीनहीं
जबभीजाएकोईछोड़करजा-ब-जामैंतड़पताफिरूँ
बेकलीहोमुबारकमुझेबेहिसीमुझसेेहोतीनहीं
हैतवक़्क़ोतुम्हेंनूरकीतोमुझेछोड़जाओअभी
तीरगीमेरीजातीनहींरौशनीमुझसेेहोतीनहीं
शाहकीहाँमेंहामीभरोसचछुपाओक़सीदेपढ़ो
ख़ैरहोदारकीझूठकीपैरवीमुझसेेहोतीनहीं
तुमज़मींपरनहींसकेऔरदु'आभीपहुँचीवहाँ
आजिज़ीमेरीजातीनहींबंदगीमुझसेेहोतीनहीं
शुक्रतेराहैबे-वफ़ातूनेहमकोदियाहैसबक़
सोकिसीहुस्नकेबुतकीअबबंदगीमुझसेेहोतीनहीं
  - Abdulla Asif
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