jaisa bhi sochta hai tu waisa nahin hooñ main | जैसा भी सोचता है तू वैसा नहीं हूँ मैं

  - Abdulla Asif
जैसाभीसोचताहैतूवैसानहींहूँमैं
जैसातूचाहताहैबसऐसानहींहूँमैं
हरकोईतोड़नेमेंहीमुझकोलगाहैसिर्फ़
समझाएइनकोकोईकिरिश्तानहींहूँमैं
कबसेहूँमुंतज़िरवोमेराहालपूछलें
औरमुस्कुराकेमैंकहूँअच्छानहींहूँमैं
आँधीकोचाहिएकिवोमेराकरेअदब
खिड़कीकेपासरहताहूँबुझतानहींहूँमैं
मेरीकमीनहींजोमैंरोशननहींहुआ
ऐसीहथेलियोंपेहीखिलतानहींहूँमैं
यातोपियागयायागिरायागयामुझे
बोतलमेंजोबचाहैवोहिस्सानहींहूँमैं
दरियाकोपारमैंकरूँँरस्तानिकालकर
नावेंमुझेभीचाहिएमूसानहींहूँमैं
तेरेबदनकीजुस्तुजूकलथीआजहै
यानीकितुझसेेप्यारहीकरतानहींहूँमैं
इकबारखोदियामुझेफिरखोदियामुझे
ख़ुदकोभीबारबारमैंमिलतानहींहूँमैं
कितनीदफ़ाहुएहैंयेदुश्मनपेबे-असर
अबतीरदोस्तीकेचलातानहींहूँमैं
  - Abdulla Asif
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