shab-e-siyaah guzarti hai kin azaabon men | शब-ए-सियाह गुज़रती है किन अज़ाबों में

  - Ashu Mishra
शब-ए-सियाहगुज़रतीहैकिनअज़ाबोंमें
बिखरतेशहरकेमंज़रहैंमेरेख़्वाबोंमें
येआपगिनिएकीलाशेंकिधरज़ियादाहैं
मैंतंग-दस्तहूँइसतरहकेहिसाबोंमें
लिखाहुआथाकिइकदूसरेसेप्यारकरो
जलेघरोंसेमिलीअध-जलीकिताबोंमें
सुकूँकाकोईभीलम्हाहमेंनसीबनहीं
ख़ुशीकीकोईभीसरगमनहींरबाबोंमें
मैंबातबातपेरोनेलगाहूँसोयारब
तूमेरीख़ामुशीकोदर्जकरजवाबोंमें
  - Ashu Mishra
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