vasl ki to kabhi furqat ki ghazal likhte hain | वस्ल की तो कभी फ़ुर्क़त की ग़ज़ल लिखते हैं

  - Ashok Mizaj Badr
वस्लकीतोकभीफ़ुर्क़तकीग़ज़ललिखतेहैं
हमतोशाइ'रहैंमोहब्बतकीग़ज़ललिखतेहैं
पढ़िएउनकोकिसीकाग़ज़पेनहींसरहदपर
अपनेख़ूँसेजोशहादतकीग़ज़ललिखतेहैं
रहनुमाअपनेवतनकेभीहैंकितनेशातिर
वोशहादतपेसियासतकीग़ज़ललिखतेहैं
तुमनेमज़दूरकेछालेनहींदेखेशायद
अपनेहाथोंपेवोमेहनतकीग़ज़ललिखतेहैं
मुल्कऐसेभीहैंकुछख़ासपड़ोसीअपने
सरहदोंपेजोअदावतकीग़ज़ललिखतेहैं
हमसभीचैनसेसोतेहैंमगररातोंमें
फ़ौजवालेतोहिफ़ाज़तकीग़ज़ललिखतेहैं
शौक़लिखनेकाबहुतहमकोभीहैलेकिनहम
सोनेकेपेनसेग़ुर्बतकीग़ज़ललिखतेहैं
  - Ashok Mizaj Badr
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