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Mahesh Natakwala
kitaabon ne dabaakar ke rakhen hai raaz seene men
kitaabon ne dabaakar ke rakhen hai raaz seene men | किताबों ने दबाकर के रखें है राज़ सीने में
- Mahesh Natakwala
किताबों
ने
दबाकर
के
रखें
है
राज़
सीने
में
ज़रा
इनको
कभी
खोलो
मज़ा
आएगा
जीने
में
- Mahesh Natakwala
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चादर
की
इज़्ज़त
करता
हूँ
और
पर्दे
को
मानता
हूँ
हर
पर्दा
पर्दा
नइँ
होता
इतना
मैं
भी
जानता
हूँ
Ali Zaryoun
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मुँह
फेर
कर
वो
कहते
हैं
बस
मान
जाइए
इस
शर्म
इस
लिहाज़
के
क़ुर्बान
जाइए
Bekhud Dehelvi
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जवाँ
होने
लगे
जब
वो
तो
हम
से
कर
लिया
पर्दा
हया
यक-लख़्त
आई
और
शबाब
आहिस्ता
आहिस्ता
Ameer Minai
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लिपट
भी
जा
न
रुक
'अकबर'
ग़ज़ब
की
ब्यूटी
है
नहीं
नहीं
पे
न
जा
ये
हया
की
ड्यूटी
है
Akbar Allahabadi
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हम
पे
एहसान
हैं
उदासी
के
मुस्कुराएँ
तो
शर्म
आती
है
Varun Anand
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जो
तेरी
बाँहों
में
हँसती
रही
है
खेली
है
वो
लड़की
राज़
नहीं
है
कोई
पहेली
है
हाँ
मेरा
हाथ
पकड़
कर
झटक
दिया
उसने
सहारा
दे
के
बताया
कि
तू
अकेली
है
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Tajdeed Qaiser
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मोहब्बत
एक
पाकीज़ा
अमल
है
इस
लिए
शायद
सिमट
कर
शर्म
सारी
एक
बोसे
में
चली
आई
Munawwar Rana
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मोहब्बत
के
इक़रार
से
शर्म
कब
तक
कभी
सामना
हो
तो
मजबूर
कर
दूँ
Akhtar Shirani
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हया
से
सर
झुका
लेना
अदास
मुस्कुरा
देना
हसीनों
को
भी
कितना
सहल
है
बिजली
गिरा
देना
Akbar Allahabadi
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किसी
के
झूठ
से
पर्दा
हटाकर
हमारा
सच
बहुत
रोया
था
उस
दिन
Shadab Asghar
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हर
टूटे
दिल
वाले
से
मेरा
कोई
रिश्ता
है
लगता
है
जैसे
मुझ
में
उसका
कोई
हिस्सा
है
Mahesh Natakwala
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उसे
मालूम
था
वो
अब
हमारा
हो
नहीं
सकता
बिना
उसके
हमारा
तो
गुज़ारा
हो
नहीं
सकता
Mahesh Natakwala
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कोई
पूछे
न
ये
रिश्ता
हमारा
नदी
है
वो
मैं
हूँ
उसका
किनारा
नहीं
कोई
मिरा
अब
है
पराया
मिला
हूँ
जिस
से
अब
वो
है
हमारा
किसी
को
मिलता
है
हक़
ये
नहीं
पर
मिला
है
ये
तुम्हें
हिस्सा
तुम्हारा
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Mahesh Natakwala
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ज़ुदा
होकर
मिरे
से
उस
की
आँखों
में
भी
पानी
है
मैं
दरिया
हूँ
नदी
है
वो
तो
उस
में
भी
रवानी
है
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Mahesh Natakwala
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रहा
यारों
की
महफ़िल
में
तो
दिल
बहला
रहा
मेरा
हुआ
ख़ाली
मकाँ
मेरा
तो
सब
ग़म
याद
आए
है
Mahesh Natakwala
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