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A R Sahil "Aleeg"
she'r padhna aur koi she'r kehna sahab
she'r padhna aur koi she'r kehna sahab | शे'र पढ़ना और कोई शे'र कहना, साहब
- A R Sahil "Aleeg"
शे'र
पढ़ना
और
कोई
शे'र
कहना,
साहब
फ़र्क़
दोनो
में
ज़मीं
और
आसमाँ
जितना
है
- A R Sahil "Aleeg"
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आसमाँ
में
है
ख़ुदा,
क्या
सब
दुआएंँ
आसमाँ
तक
जा
रही
हैं
मेरी
इक
फ़रयाद
पूरी
हो
तो
मैं
मानूँ
वहाँ
तक
जा
रही
हैं
Saahir
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हम
वो
हैं
जो
नइँ
डरते
वक़्त
के
इम्तिहान
से
वो
परिंदे
और
थे
जो
डर
गए
आसमान
से
Madhav
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आसमाँ
ने
बंद
कर
लीं
खिड़कियाँ
अब
ज़मीं
में
उसकी
दिलचस्पी
नहीं
Rajesh Reddy
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मुझे
मालूम
है
उस
का
ठिकाना
फिर
कहाँ
होगा
परिंदा
आसमाँ
छूने
में
जब
नाकाम
हो
जाए
Bashir Badr
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कभी
किसी
को
मुकम्मल
जहाँ
नहीं
मिलता
कहीं
ज़मीन
कहीं
आसमाँ
नहीं
मिलता
Nida Fazli
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वो
क़हर
था
कि
रात
का
पत्थर
पिघल
पड़ा
क्या
आतिशीं
गुलाब
खिला
आसमान
पर
Zafar Iqbal
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वक़्त
आने
दे
दिखा
देंगे
तुझे
ऐ
आसमाँ
हम
अभी
से
क्यूँँ
बताएँ
क्या
हमारे
दिल
में
है
Bismil Azimabadi
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वो
मिलेंगे
उस
जहाँ
के
आसमाँ
में
मिल
न
पाए
जो
परिंदे
इस
ज़मीं
पर
Raj Tiwari
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सोचता
हूँ
कि
यूँँ
न
हो
इक
दिन
ये
ज़मीं
कोई
आसमाँ
निकले
Vikas Rana
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शब-ए-विसाल
बहुत
कम
है
आसमाँ
से
कहो
कि
जोड़
दे
कोई
टुकड़ा
शब-ए-जुदाई
का
Ameer Minai
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चाँदनी
शब,
गज़ाल,
इश्क़,
सबा
सब
ही
किरदार
ये
ग़ज़ल
के
हैं
A R Sahil "Aleeg"
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है
मरज़
कोई
या
दवा
है
इश्क़
कोई
बतलाए
हम
को
क्या
है
इश्क़
पहले
करता
था
क़ल्ब
को
रौशन
आज
कल
तो
बुझा-
बुझा
है
इश्क़
पास
जो
कुछ
था
लग
गया
पहले
दाँव
पर
अब
तो
बस
लगा
है
इश्क़
अपनी
पलकें
उठाओ
ढूँढने
दो
बस
यहीं
पे
कहीं
छुपा
है
इश्क़
हम
फ़क़ीरों
के
पास
कुछ
भी
नहीं
हम
फ़क़ीरों
की
बस
दु'आ
है
इश्क़
जाने
किस
किस
से
इश्क़
होना
था
जाने
किस
किस
से
हो
रहा
है
इश्क़
आशिक़ी
के
सफ़र
की
ऐ
'साहिल'
इब्तिदा
है
या
इंतिहा
है
इश्क़
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A R Sahil "Aleeg"
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इश्क़
तौफ़ीक़
भी
है
क़िस्मत
भी
इश्क़
मिलता
नहीं
त'अक़्क़ुब
से
A R Sahil "Aleeg"
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रहे
क़ाएम-ओ-दाइम
अहद-ओ-पैमाँ
पर
कहाँ
मिलते
हैं
ऐसे
नस्ल-ए-आदम
अब
A R Sahil "Aleeg"
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चार
भित्ति,
ज़मीं,
कुतुब,
इक
छत
कुछ
गज़ाला
के,
कुछ
सबा
के
ख़त
घर
में
क़ब्ज़ा
जमा
के
बैठे
हैं
हिज्र,मातम,
चुभन,
कसक,
ख़ल्वत
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