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A R Sahil "Aleeg"
qismat waalon ki hoti hai muraad poori
qismat waalon ki hoti hai muraad poori | क़िस्मत वालों की होती है मुराद पूरी
- A R Sahil "Aleeg"
क़िस्मत
वालों
की
होती
है
मुराद
पूरी
ये
लाज़मी
तो
नहीं
कि
सब
क़िस्मत
वाले
हो
- A R Sahil "Aleeg"
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दिल
को
तेरी
चाहत
पे
भरोसा
भी
बहुत
है
और
तुझ
से
बिछड़
जाने
का
डर
भी
नहीं
जाता
Ahmad Faraz
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नहीं
निगाह
में
मंज़िल
तो
जुस्तुजू
ही
सही
नहीं
विसाल
मुयस्सर
तो
आरज़ू
ही
सही
Faiz Ahmad Faiz
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इतना
ऊँचा
उड़ना
भी
कुछ
ठीक
नहीं
पाबंदी
लग
जाती
है
परवाज़ों
पर
तुझको
छू
कर
और
किसी
की
चाह
रखे
हैरत
है
और
लानत
है
ऐसे
हाथों
पर
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Varun Anand
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ज़ख़्म
उनके
लिए
मेहमान
हुआ
करते
हैं
मुफ़लिसी
जो
तेरे
दरबान
हुआ
करते
हैं
वो
अमीरों
के
लिए
आम
सी
बातें
होंगी
हम
ग़रीबों
के
जो
अरमान
हुआ
करते
हैं
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Mujtaba Shahroz
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आरज़ू
वस्ल
की
रखती
है
परेशाँ
क्या
क्या
क्या
बताऊँ
कि
मेरे
दिल
में
है
अरमाँ
क्या
क्या
Akhtar Shirani
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वही
मंज़िलें
वही
दश्त
ओ
दर
तिरे
दिल-ज़दों
के
हैं
राहबर
वही
आरज़ू
वही
जुस्तुजू
वही
राह-ए-पुर-ख़तर-ए-जुनूँ
Noon Meem Rashid
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पुरानी
चाहत
के
ज़ख़्म
अब
तक
भरे
नहीं
हैं
और
एक
लड़की
पड़ी
है
पीछे
बड़े
जतन
से
Ashu Mishra
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हज़ारों
ख़्वाहिशें
ऐसी
कि
हर
ख़्वाहिश
पे
दम
निकले
बहुत
निकले
मिरे
अरमान
लेकिन
फिर
भी
कम
निकले
Mirza Ghalib
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मिरी
आरज़ू
का
हासिल
तिरे
लब
की
मुस्कुराहट
हैं
क़ुबूल
मुझ
को
सब
ग़म
तिरी
इक
ख़ुशी
के
बदले
Kashif Adeeb Makanpuri
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बन
कर
कसक
चुभती
रही
दिल
में
मिरे
इक
आह
थी
ऐ
हम–नफ़स
मेरे
मुझे
तुझ
सेे
वफ़ा
की
चाह
थी
Dhiraj Singh 'Tahammul'
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जहाँ
के
इल्ज़ाम
का
क्या
बुरा
मानूँ
लगाए
इल्ज़ाम
अपनों
ने
भी
मुझ
पर
A R Sahil "Aleeg"
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एक
दूजे
को,
आज़माने
के
सिलसिले
रखते,
आने-जाने
के
इक
बहाना
भी,
क्या
कहें
उनका
सौ
बहाने
हैं,
इक
बहाने
के
अहतियातन,
दिखा
दिए
हैं
तुम्हें
ज़ख़्म
होते
नहीं,
दिखाने
के
दाने
दाने
पे,
नाम
लिक्खा
है
खाने
वाले
हैं,
दाने
दाने
के
इश्क़
के
दर
प,
आने
वाले
लोग
रह
न
पाए,
किसी
ठिकाने
के
आपका
ग़म
भी,कोई
ग़म
है
क्या?
हमने
झेले
हैं,
ग़म
ज़माने
के
बस,
यही
एक
है,
मेरी
हमदर्द
पास
बैठी
क़ज़ा,
जो
शाने
के
उनकी
ज़िद
है,तो
तोड़
दें
वो
दिल
शोर
हम
भी,
नहीं
मचाने
के
करले
तूफ़ान,
सौ
सितम
हम
पे
हम
चराग़ाँ,
नहीं
बुझाने
के
अब
जो
मक़तल
में,
आ
गए
हैं
हम
पाँव
पीछे,
नहीं
हटाने
के
मत
सुना
हमको,
फ़ाइलुन
फ़यलुन
हम
भी
हैं,
दाग़
के
घराने
के
वो
ही
तोड़े
थे,
आप
ने
'साहिल'
जो
थे,
वादे-वफ़ा
निभाने
के
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A R Sahil "Aleeg"
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हम
अदू
से
भी
हिक़ारत
नहीं
करने
वाले
हुस्नो-ज़ीनत
की
इबादत
नहीं
करने
वाले
A R Sahil "Aleeg"
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इश्क़
का
ही
सुरूर
है
साहिल
उनके
चेहरे
पे
नूर
है
साहिल
A R Sahil "Aleeg"
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ज़िंदगी
तो
है
दर्स-ओ-तदरीस
का
नाम,
हाँ
लेकिन
आदमी
को
परखने
का
नाम
भी
ज़िंदगी
ही
है
A R Sahil "Aleeg"
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