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A R Sahil "Aleeg"
jahaan waalon ne hukqa-paani meraa band kar rakha
jahaan waalon ne hukqa-paani meraa band kar rakha | जहाँ वालों ने हुक़्क़ा-पानी मेरा बंद कर रक्खा
- A R Sahil "Aleeg"
जहाँ
वालों
ने
हुक़्क़ा-पानी
मेरा
बंद
कर
रक्खा
ख़ता
इतनी
सी
है
मेरी
किया
था
इश्क़
जो
मैने
- A R Sahil "Aleeg"
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मैं
बाल
बाल
बच
गया
हर
बार
इश्क़
से
सर
के
बहुत
क़रीब
से
पत्थर
गुज़र
गए
Umair Najmi
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अपने
इश्क़
का
यूँँ
इज़हार
करना
है
तुझ
सेे
तुझको
हाथों
से
पहनाएँगें
कानों
में
झुमके
Harsh saxena
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सताना
रूठ
जाना
और
मनाना
इश्क़
है
लेकिन
अगर
हद
से
ज़ियादा
हो
तो
रिश्ते
टूट
जाते
हैं
Ajeetendra Aazi Tamaam
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हर
गाम
तेरे
इश्क़
का
इकरार
है
मैं
हूँ
ज़ंजीर
है
ज़ंजीर
की
झनकार
है
मैं
हूँ
ऐ
ज़ीस्त
जो
सब
सेे
बड़ी
फ़नकार
है
तू
है
और
तुझ
सेे
बड़ा
वो
जो
अदाकार
है
मैं
हूँ
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Obaid Azam Azmi
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नींद
के
दायरे
में
हाज़िर
हूँ
ख़्वाब
के
रास्ते
में
हाज़िर
हूँ
याद
है
इश्क़
था
कभी
मुझ
सेे
मैं
उसी
सिलसिले
में
हाज़िर
हूँ
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Ejaz Tawakkal Khan
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गुदाज़-ए-इश्क़
नहीं
कम
जो
मैं
जवाँ
न
रहा
वही
है
आग
मगर
आग
में
धुआँ
न
रहा
Jigar Moradabadi
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तमाम
हैं
बिमारियाँ
मगर
तुम्हें
हुआ
है
इश्क़
तो
अब
तुम्हें
ज़रूरत-ए-दुआ
ही
है
दवा
नहीं
Hasan Raqim
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क्या
ग़लत-फ़हमी
में
रह
जाने
का
सदमा
कुछ
नहीं
वो
मुझे
समझा
तो
सकता
था
कि
ऐसा
कुछ
नहीं
इश्क़
से
बच
कर
भी
बंदा
कुछ
नहीं
होता
मगर
ये
भी
सच
है
इश्क़
में
बंदे
का
बचता
कुछ
नहीं
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Tehzeeb Hafi
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आग
थे
इब्तिदा-ए-इश्क़
में
हम
अब
जो
हैं
ख़ाक
इंतिहा
है
ये
Meer Taqi Meer
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इश्क़
को
छोड़
सब
चुन
लिया
उसने
फिर
रख
दिया
फल
को
फिर
टोकरी
से
अलग
Neeraj Neer
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इश्क़
जो
मर
चुका
सालों
पहले
आज
भी
ज़ी-नफ़स
है
गज़लों
में
A R Sahil "Aleeg"
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इक
तमाशा
बन
चुका
है
इश्क़
में
जज़्बात-ए-दिल
का
ख़ुद
को
अब
और
इश्क़
में
रुस्वा
करूँँ
हिम्मत
नहीं
है
A R Sahil "Aleeg"
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है
मुयस्सर
सब
को
मेरी
डायरी
जिस
को
लिखा
है
शा'इरी
में
गर
जो
चाहो
तुम
भी
पढ़
लो
ज़िंदगी
और
इश्क़
के
सब
ज़ाती
क़िस्से
A R Sahil "Aleeg"
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कर
चुके
हम
बिहार
से
तौबा
भाड़
में
जाए
अब
मुज़फ़्फ़रपुर
A R Sahil "Aleeg"
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न
बदली
है
ज़मीं
ये
और
ये
अंबर
नहीं
बदला
तुम्हारी
याद
बसती
है
तभी
तो
घर
नहीं
बदला
कहीं
ऐसा
न
हो
तुम
याद
कर
लो
इस
सबब
हमने
बहुत
बदले
हैं
मोबाइल
मगर
नंबर
नहीं
बदला
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A R Sahil "Aleeg"
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