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A R Sahil "Aleeg"
ishq ki aag men jalen hain jo
ishq ki aag men jalen hain jo | इश्क़ की आग में जलें हैं जो
- A R Sahil "Aleeg"
इश्क़
की
आग
में
जलें
हैं
जो
उनको
दोज़ख़
का
ख़ौफ़
होता
नहीं
- A R Sahil "Aleeg"
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ऐ
मौज-ए-हवादिस
तुझे
मालूम
नहीं
क्या
हम
अहल-ए-मोहब्बत
हैं
फ़ना
हो
नहीं
सकते
Asad Bhopali
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मैं
चाहता
हूँ
मोहब्बत
मेरा
वो
हाल
करे
कि
ख़्वाब
में
भी
दोबारा
कभी
मजाल
न
हो
Jawwad Sheikh
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तुम
मेरी
पहली
मोहब्बत
तो
नहीं
हो
लेकिन
मैंने
चाहा
है
तुम्हें
पहली
मोहब्बत
की
तरह
Wasi Shah
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तेरे
वादे
से
प्यार
है
लेकिन
अपनी
उम्मीद
से
नफ़रत
है
पहली
ग़लती
तो
इश्क़
करना
थी
शा'इरी
दूसरी
हिमाक़त
है
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Mehshar Afridi
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इस
त'अल्लुक़
में
नहीं
मुमकिन
तलाक़
ये
मोहब्बत
है
कोई
शादी
नहीं
Anwar Shaoor
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अवल्ली
इश्क़
के
एहसास
भी
तारी
रक्खे
और
इस
बीच
नए
काम
भी
जारी
रक्खे
मैंने
दिल
रख
लिया
है
ये
भी
कोई
कम
तो
नहीं
दूसरा
ढूँढ़
लो
जो
बात
तुम्हारी
रक्खे
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Ashu Mishra
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यूँँ
कहें
नुमाइशों
के
दिन
क़रीब
आ
गए
महज़
फ़रवरी
हो
किस
तरह
महीना
इश्क़
का
Neeraj Neer
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तुम्हारे
साथ
था
तो
मैं
गम-ए-उल्फ़त
में
उलझा
था
तुम्हें
छोड़ा
तो
ये
जाना
कि
दुनिया
ख़ूब-सूरत
है
Nirbhay Nishchhal
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ये
मोहब्बत
है
ये
मर
जाने
से
भी
जाती
नहीं
तू
कोई
क़ैदी
नहीं
है
जो
रिहा
हो
जाएगा
Ali Zaryoun
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इश्क़
नाज़ुक-मिज़ाज
है
बेहद
अक़्ल
का
बोझ
उठा
नहीं
सकता
Akbar Allahabadi
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इश्क़
करने
का
शौक़
रखते
हो
गर
जुरअत-ए
-हिज्र-
ए-
जावेदानी
भी
रख
A R Sahil "Aleeg"
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जो
मुझे
हर
तरफ़
से
घेरे
हैं
ये
ग़मों
के
हसीं
अँधेरे
हैं
जिनको
रहबर
समझ
रहा
है
तू
ग़ौर
से
देख
सब
लुटेरे
हैं
अब
किधर
आशियाँ
बनाएँ
हम
चार-सू
बिजलियों
के
डेरे
हैं
मुँह
छुपाएँ
घटाएँ
शरमाएँ
बाल
उसने
भी
क्या
बिखेरे
हैं
लब
पे
ता'रीफ़ें
हैं
रक़ीबों
की
वैसे
वो
जाँ-निसार
मेरे
हैं
और
तो
कुछ
नहीं
बचा
है
इधर
दिल
में
ज़ख़्मों
के
उजड़े
डेरे
हैं
दरमियाँ
यूँँ
हुआ
है
बँटवारा
सब
ख़ुशी
उनकी
रंज
मेरे
हैं
गुल
तो
सारे
निगल
चुकी
है
ख़िज़ाँ
अब
तो
शाख़ों
को
ख़ार
घेरे
हैं
मुझको
'साहिल'
नवाज़ते
हैं
ग़म
जितने
ये
ग़म-गुसार
मेरे
हैं
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A R Sahil "Aleeg"
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ये
दुनिया
तो
ग़ज़ालाँ
की
है
इक
जंगल
मगर
'साहिल'
ये
जो
है
इश्क़
ये
हर
इक
ग़ज़ाला
से
नहीं
होता
A R Sahil "Aleeg"
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फ़क़त
इक
ने
बुरा
जो
कह
दिया
तो
शोर
इतना
क्यूँ
तेरी
ख़ातिर
ज़माने
में
कहलवाया
बुरा
ख़ुद
को
A R Sahil "Aleeg"
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क़दम
क़दम
पे
मेरा
इम्तिहान
लेते
हैं
वो
इश्क़
करते
हैं
ये
मेरी
जान
लेते
हैं
A R Sahil "Aleeg"
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