जो मुझे हर तरफ़ से घेरे हैं

  - A R Sahil "Aleeg"
जोमुझेहरतरफ़सेघेरेहैं
येग़मोंकेहसींअँधेरेहैं
जिनकोरहबरसमझरहाहैतू
ग़ौरसेदेखसबलुटेरेहैं
अबकिधरआशियाँबनाएँहम
चार-सूबिजलियोंकेडेरेहैं
मुँहछुपाएँघटाएँशरमाएँ
बालउसनेभीक्याबिखेरेहैं
लबपेता'रीफ़ेंहैंरक़ीबोंकी
वैसेवोजाँ-निसारमेरेहैं
औरतोकुछनहींबचाहैइधर
दिलमेंज़ख़्मोंकेउजड़ेडेरेहैं
दरमियाँयूँँहुआहैबँटवारा
सबख़ुशीउनकीरंजमेरेहैं
गुलतोसारेनिगलचुकीहैख़िज़ाँ
अबतोशाख़ोंकोख़ारघेरेहैं
मुझको'साहिल'नवाज़तेहैंग़म
जितनेयेग़म-गुसारमेरेहैं
  - A R Sahil "Aleeg"
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