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A R Sahil "Aleeg"
ishq ka hi ye asar hai chhod bhi doon gar khula
ishq ka hi ye asar hai chhod bhi doon gar khula | इश्क़ का ही ये असर है छोड़ भी दूँ गर खुला
- A R Sahil "Aleeg"
इश्क़
का
ही
ये
असर
है
छोड़
भी
दूँ
गर
खुला
शाम
होते
ही
परिंदा
लौट
कर
आ
जाएगा
- A R Sahil "Aleeg"
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बाक़ी
सारे
काम
भुलाकर
इश्क़
किया
सुब्ह
से
लेकर
शाम
बराबर
इश्क़
किया
ग़लती
ये
थोड़े
थी
इश्क़
किया
हम
ने
ग़लती
ये
थी
ग़ैर
बिरादर
इश्क़
किया
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Vashu Pandey
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वो
न
आएगा
हमें
मालूम
था
इस
शाम
भी
इंतिज़ार
उस
का
मगर
कुछ
सोचकर
करते
रहे
Parveen Shakir
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ख़ुश
रहते
हैं
हँस
सकते
हैं
भोले
भाले
होते
हैं
वो
जो
शे'र
नहीं
कहते
हैं
क़िस्मत
वाले
होते
हैं
पीना
अच्छी
बात
नहीं
है
आते
हैं
समझाने
दोस्त
और
ढलते
ही
शाम
उन्हें
फिर
हमीं
सँभाले
होते
हैं
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Vineet Aashna
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उजाले
अपनी
यादों
के
हमारे
साथ
रहने
दो
न
जाने
किस
गली
में
ज़िंदगी
की
शाम
हो
जाए
Bashir Badr
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शाम-ए-ग़म
करवट
बदलता
ही
नहीं
वक़्त
भी
ख़ुद्दार
है
तेरे
बग़ैर
Shakeel Badayuni
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मिरी
ग़ज़ल
की
तरह
उस
की
भी
हुकूमत
है
तमाम
मुल्क
में
वो
सब
से
ख़ूब-सूरत
है
बहुत
दिनों
से
मिरे
साथ
थी
मगर
कल
शाम
मुझे
पता
चला
वो
कितनी
ख़ूब-सूरत
है
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Bashir Badr
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अभी
तो
शाम
की
दस्तक
हुई
है
अभी
से
लग
गया
बिस्तर
हमारा
यही
तन्हाई
है
जन्नत
हमारी
इसी
जन्नत
में
है
अब
घर
हमारा
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Vikas Sharma Raaz
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तू
नया
है
तो
दिखा
सुब्ह
नई
शाम
नई
वर्ना
इन
आँखों
ने
देखे
हैं
नए
साल
कई
Faiz Ludhianvi
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मगर
गुज़ारनेवालों
के
दिन
गुज़रते
हैं
तेरे
फ़िराक़
में
यूँँ
सुबह-ओ-शाम
करते
हैं
Faiz Ahmad Faiz
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फिर
आज
'अदम'
शाम
से
ग़मगीं
है
तबीअत
फिर
आज
सर-ए-शाम
मैं
कुछ
सोच
रहा
हूँ
Abdul Hamid Adam
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इश्क़
करता
जो
वफ़ा
होता
नहीं
कोई
मलाल
याद
में
पल
जो
गुज़ारूँ
भी
तो
घिन
आती
है
A R Sahil "Aleeg"
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इश्क़
में
रिस्क
लीजिए
साहब
ऐसे
डरने
से
कुछ
नहीं
होगा
A R Sahil "Aleeg"
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जो
भी
कहा
ग़ज़ाला
तुमने
सच
ही
था
कुछ
भी
तो
कर
नहीं
पाए
ग़ज़ाल
तुम
A R Sahil "Aleeg"
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उम्र
भर
इश्क़
किया
हमने
तो
इतना
जाना
इश्क़
अलफ़ाज़
की
इक
भूल-भुलय्या
है
बस
A R Sahil "Aleeg"
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न
तेरा
न
मेरा
न
किसी
और
ही
का
है
जो
जिसका
है
वो
सिर्फ़
उसी
का
है
A R Sahil "Aleeg"
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