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A R Sahil "Aleeg"
ishq ik taufeeq hai aur
ishq ik taufeeq hai aur | इश्क़ इक तौफ़ीक़ है और
- A R Sahil "Aleeg"
इश्क़
इक
तौफ़ीक़
है
और
रब
नहीं
देता
सभी
को
- A R Sahil "Aleeg"
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वहशत-ए-दिल
के
ख़रीदार
भी
नापैद
हुए
कौन
अब
इश्क़
के
बाज़ार
में
खोलेगा
दुकाँ
Ibn E Insha
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फ़ुर्सत
नहीं
मुझे
कि
करूँँ
इश्क़
फिर
से
अब
माज़ी
की
चोटों
से
अभी
उभरा
नहीं
हूँ
मैं
डर
है
कहीं
ये
ऐब
उसे
रुस्वा
कर
न
दे
सो
ग़म
में
भी
शराब
को
छूता
नहीं
हूँ
मैं
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Harsh saxena
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इश्क़
के
इज़हार
में
हर-चंद
रुस्वाई
तो
है
पर
करूँँ
क्या
अब
तबीअत
आप
पर
आई
तो
है
Akbar Allahabadi
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उन
आँखों
का
मुझ
से
कोई
वा'दा
तो
नहीं
है
थोड़ी
सी
मोहब्बत
है
ज़ियादा
तो
नहीं
है
Firasat rizvi
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और
भी
दुख
हैं
ज़माने
में
मोहब्बत
के
सिवा
राहतें
और
भी
हैं
वस्ल
की
राहत
के
सिवा
Faiz Ahmad Faiz
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बैठा
हूँ
अभी
सामने
और
सोच
रहा
हूँ
इज़हार
पे
मेरे
भला
क्या
मेरा
बनेगा
Afzal Ali Afzal
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मैं
सोचता
हूँ
जब
कभी
आओगी
सामने
किस
मुँह
से
कह
सकूँगा
मोहब्बत
नहीं
रही
Shoonya
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इलाज
अपना
कराते
फिर
रहे
हो
जाने
किस
किस
से
मोहब्बत
कर
के
देखो
ना
मोहब्बत
क्यूँँ
नहीं
करते
Farhat Ehsaas
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तेरे
बग़ैर
ख़ुदा
की
क़सम
सुकून
नहीं
सफ़ेद
बाल
हुए
हैं
हमारा
ख़ून
नहीं
न
हम
ही
लौंडे
लपाड़ी
न
कच्ची
उम्र
का
वो
ये
सोचा
समझा
हुआ
इश्क़
है
जुनून
नहीं
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Shamim Abbas
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ज़िंदगी
यूँँही
बहुत
कम
है
मोहब्बत
के
लिए
रूठ
कर
वक़्त
गँवाने
की
ज़रूरत
क्या
है
Unknown
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ख़ुद
को
पहले
ढूँढ़
लो
पहचान
लो
फिर
ख़ुद-ब-ख़ुद
तुम
को
ख़ुदा
मिल
कर
रहेगा
A R Sahil "Aleeg"
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कभी
देखा
नहीं
उनको
जी
भर
कर
और
वो
कहते
हैं
पुजारी
हूँ
हवस
का
मैं
A R Sahil "Aleeg"
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न
कर
पाया
ख़ुदा
को
जब
मैं
राज़ी
फिर
बता
मुझको
करूँँंँगा
क्या?
ले
कर
शोहरत
ये
दौलत
या
वो
लड़की
अब
A R Sahil "Aleeg"
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हम
ने
देखा
है
हुस्न
का
दरिया
रोज़
सौ
कश्तियाँ
डुबोता
है
जिस
को
मिल
जाए
इश्क़
में
'साहिल'
सच
में
वो
ख़ुश-नसीब
होता
है
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A R Sahil "Aleeg"
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चार
भित्ति,
ज़मीं,
कुतुब,
इक
छत
कुछ
गज़ाला
के,
कुछ
सबा
के
ख़त
घर
में
क़ब्ज़ा
जमा
के
बैठे
हैं
हिज्र,मातम,
चुभन,
कसक,
ख़ल्वत
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A R Sahil "Aleeg"
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