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A R Sahil "Aleeg"
ana aur ishq men koi bhi samjhauta na ho paaya
ana aur ishq men koi bhi samjhauta na ho paaya | अना और इश्क़ में कोई भी समझौता न हो पाया
- A R Sahil "Aleeg"
अना
और
इश्क़
में
कोई
भी
समझौता
न
हो
पाया
रहा
है
इसलिए
भी
आंकड़ा
छत्तीस
का
इन
में
- A R Sahil "Aleeg"
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बे-ख़ुदी
बे-सबब
नहीं
'ग़ालिब'
कुछ
तो
है
जिस
की
पर्दा-दारी
है
Mirza Ghalib
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ऐ
"दाग़"
बुरा
मान
ना
तू
उसके
कहे
का
माशूक
की
गाली
से
तो
इज़्ज़त
नहीं
जाती
Dagh Dehlvi
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कम
से
कम
मैंने
छुपा
ली
देख
कर
सिगरेट
तुम्हें
और
इस
लड़के
से
तुमको
कितनी
इज़्ज़त
चाहिए
Nadeem Shaad
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तू
मोहब्बत
नहीं
समझती
है
हम
भी
अपनी
अना
में
जलते
हैं
इस
दफा
बंदिशें
ज़ियादा
हैं
छोड़
अगले
जनम
में
मिलते
हैं
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Ritesh Rajwada
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ख़िलाफ़-ए-शर्त-ए-अना
था
वो
ख़्वाब
में
भी
मिले
मैं
नींद
नींद
को
तरसा
मगर
नहीं
सोया
ख़िलाफ़-ए-मौसम-ए-दिल
था
कि
थम
गई
बारिश
ख़िलाफ़-ए-ग़ुर्बत-ए-ग़म
है
कि
मैं
नहीं
रोया
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Khalil Ur Rehman Qamar
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हर
किसी
से
ही
मुहब्बत
माँगता
है
दिल
तो
अब
सब
सेे
अक़ीदत
माँगता
है
सीख
आया
है
सलीक़ा
ग़ुफ़्तगू
का
मुझ
सेे
मेरा
दोस्त
इज़्ज़त
माँगता
है
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दिन
रात
मय-कदे
में
गुज़रती
थी
ज़िंदगी
'अख़्तर'
वो
बे-ख़ुदी
के
ज़माने
किधर
गए
Akhtar Shirani
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हम
ने
क़ुबूल
कर
लिया
अपना
हर
एक
जुर्म
अब
आप
भी
तो
अपनी
अना
छोड़
दीजिए
Harsh saxena
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मोहब्बत
नेक-ओ-बद
को
सोचने
दे
ग़ैर-मुमकिन
है
बढ़ी
जब
बे-ख़ुदी
फिर
कौन
डरता
है
गुनाहों
से
Arzoo Lakhnavi
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चादर
की
इज़्ज़त
करता
हूँ
और
पर्दे
को
मानता
हूँ
हर
पर्दा
पर्दा
नइँ
होता
इतना
मैं
भी
जानता
हूँ
Ali Zaryoun
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मैं
मु'आफ़ी
ग़लती
की
माँगता
भी
तो
कैसे
हद
अनापरस्ती
और
उसपे
इक
शाइर
मैं
A R Sahil "Aleeg"
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जहाँ
वालों
ने
हुक़्क़ा-पानी
मेरा
बंद
कर
रक्खा
ख़ता
इतनी
सी
है
मेरी
किया
था
इश्क़
जो
मैने
A R Sahil "Aleeg"
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ये
वक़्त,
हालात,जब
तुम
से
कहने
लगे,
जी
नहीं
सकते
ऐसे
ही
हालात
में
दोस्त,
जीना
तो
लाज़िम
ही
बनता
है
A R Sahil "Aleeg"
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अब
न
कोई
दर
मेरा
और
है
न
कोई
घर
ही
मेरा
इश्क़
में
जब
से
बसाया
तू
ने
अपने
दिल
में
मुझ
को
A R Sahil "Aleeg"
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दोस्तों
क्या
हुआ
गर
नहीं
है
कोई
इश्क़
का
क़ाफ़िया
मैं
ने
भी
तो
मोहब्बत
की
है
होते
हैं
इसके
सौ
क़ाफ़िए
A R Sahil "Aleeg"
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