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A R Sahil "Aleeg"
aaj nafrat hai bhale meri ghazal se tum ko lekin
aaj nafrat hai bhale meri ghazal se tum ko lekin | आज नफ़रत है भले मेरी ग़ज़ल से तुम को लेकिन
- A R Sahil "Aleeg"
आज
नफ़रत
है
भले
मेरी
ग़ज़ल
से
तुम
को
लेकिन
गुनगुनाओगे
इन्हीं
ग़ज़लों
को
कल
जब
इश्क़
होगा
- A R Sahil "Aleeg"
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इन
दिनों
दोस्त
मेरे
सारे
ही
रूठे
हुए
हैं
मेरे
दुश्मन
यही
मौक़ा
है
हरा
दे
मुझ
को
Afzal Ali Afzal
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मुनाफ़िक़
दोस्तों
से
लाख
बेहतर
हैं
ख़ुदा
दुश्मन
कि
ग़द्दारी
नवाबों
से
हुकूमत
छीन
लेती
है
Unknown
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तेरी
तारीफ़
करने
लग
गए
हैं
तेरे
दुश्मन
हमारे
शे'र
सुनके
Tanoj Dadhich
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इश्क़
तू
ने
बड़ा
नुक़सान
किया
है
मेरा
मैं
तो
उस
शख़्स
से
नफ़रत
भी
नहीं
कर
सकता
Liaqat Jafri
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सारी
दुनिया
ने
तो
नफ़रत
से
पुकारा
मुझको
माँ
समझती
है
मगर
आँख
का
तारा
मुझको
Muneer shehryaar
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उस
दुश्मन-ए-वफ़ा
को
दु'आ
दे
रहा
हूँ
मैं
मेरा
न
हो
सका
वो
किसी
का
तो
हो
गया
Hafeez Banarasi
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उस
के
दुश्मन
हैं
बहुत
आदमी
अच्छा
होगा
वो
भी
मेरी
ही
तरह
शहर
में
तन्हा
होगा
Nida Fazli
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अगर
तू
ख़ुश
है
मेरी
हार
से
तो
मेरी
हर
जीत
से
नफ़रत
है
मुझको
Shadab Javed
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ये
सच
है
नफ़रतों
की
आग
ने
सब
कुछ
जला
डाला
मगर
उम्मीद
की
ठण्डी
हवाएँ
रोज़
आती
हैं
Munawwar Rana
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दुश्मनी
जम
कर
करो
लेकिन
ये
गुंजाइश
रहे
जब
कभी
हम
दोस्त
हो
जाएँ
तो
शर्मिंदा
न
हों
Bashir Badr
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रात
फिर
से
ख़्वाब
में
आई
थी
वो
ज़ख़्म
सारे
इश्क़
के
रिसने
लगे
A R Sahil "Aleeg"
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न
वो
ख़ुश
मुझ
सेे
न
मैं
ख़ुश
,
ख़फा
वो
भी
है,
मैं
भी
हूँ
मुसलसल
ही
चल
रही
है
लड़ाई
अपनी
ख़ुदास
A R Sahil "Aleeg"
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मैं
सुना
तो
रहा
हूँ
एक
ग़ज़ल
है
मगर
दास्ताँ
ग़ज़ाला
की
A R Sahil "Aleeg"
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हवस
का
नाम
भी
हमने,
सुना
जब
था
नहीं
साहिल
क़सम
रब
की,
किया
था
इश्क़
तब
हम
ने
गज़ाला
से
A R Sahil "Aleeg"
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समझते
हैं
हवस
को
इश्क़
जो
उनके
लिए
है
जश्न
और
बरसी
न
बरसी
है
न
कोई
जन्मदिन
ही
इश्क़
में,
ये
जानते
है
हम
A R Sahil "Aleeg"
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