mere zabt-e-gham se nikal kar dua | मेरे ज़ब्त-ए-ग़म से निकल कर दु'आ

  - A R Sahil "Aleeg"
मेरेज़ब्त-ए-ग़मसेनिकलकरदु'आ
चलीआईलबपरमचलकरदु'आ
बिछड़करमुझीसेमेरेवस्लको
करेंगेवोकरवटबदलकरदु'आ
कभीदिलउनकाकोईतोड़दे
वोमाँगेकईदिलकुचलकरदु'आ
येइंसानक्यागरख़ुदाचाहेतो
यहाँबुतभीकरदेपिघलकरदु'आ
हुआआजक्याउनकोमुल्हिदहैंजो
लगेकरनेवोदिलमसलकरदु'आ
ख़ुदापहुँचेतुझतकहैयेआरज़ू
मेरीमग़्फ़िरतकीउछलकरदु'आ
गुनाहोंकी'साहिल'सज़ाएँहैंतय
करेंतौबाका'बेमेंचलकरदु'आ
  - A R Sahil "Aleeg"
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