मानेंगे फूँक-फाँक के घर इश्क़ और तुम

  - A R Sahil "Aleeg"
मानेंगेफूँक-फाँककेघरइश्क़औरतुम
करदेंगेमुझकोज़ेर-ओ-ज़बरइश्क़औरतुम
इकहमहैजिसकोहोशनहींख़ुदकेहालका
रखतेहैंकुलजहाँकीख़बरइश्क़औरतुम
आताहैजीमेंआगलगादूँजहानको
पड़तेहैंजबभीमुझपेबिफरइश्क़औरतुम
मुझकोख़बरहैकरकेवफ़ाओंकामौइदत
जाएँगेएकरोज़मुकरइश्क़औरतुम
येसोचनाहैअबकिकिधरजाएँगेयेपाँव
उससिम्तहैजहानइधरइश्क़औरतुम
मानेंगेमेरीनावडुबोकरहीएकदिन
डालेहुएहैंदिलमेंभँवरइश्क़औरतुम
'साहिल'क़रारआएतोकैसेमुझेभला
दिनभरदुखाएरहतेहोसरइश्क़औरतुम
  - A R Sahil "Aleeg"
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