एक मुद्दत तक तो 'इश्क़ाना चला

  - A R Sahil "Aleeg"
एकमुद्दततकतो'इश्क़ानाचला
शम्असेफिरदूरपरवानाचला
ख़ुदख़ुदहोनेलगींगुलपोशियाँ
जिसतरफ़भीतेरादीवानाचला
शामढलतेयादआयाबे-वफ़ा
औरशबभरदौर-ए-पैमानाचला
दुश्मनोंकेनामभीखुलतेगए
जबग़ज़ालाकाभीअफ़्सानाचला
रातभरज़हनोंमेंसुलगीनफ़रतें
रातभरकाबा-ओ-बुतख़ानाचला
करदियाचितइश्क़नेसाहिलहमें
इकपियादाभीइकख़ानाचला
  - A R Sahil "Aleeg"
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