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Arman Habib
tiri har baat vaade kii tira daava bhi khota hai
tiri har baat vaade kii tira daava bhi khota hai | तिरी हर बात वादे की तिरा दावा भी खोटा है
- Arman Habib
तिरी
हर
बात
वादे
की
तिरा
दावा
भी
खोटा
है
तेरा
भेजा
हुआ
ख़त
भी
मुझे
मालूम
झूठा
है
मेरा
हर
लफ़्ज़
तेरा
था
मेरी
हर
साँस
थी
तेरी
करूँँ
क्या
ज़िक्र
तेरा
मैं
तेरी
ख़ूँ
में
ही
धोका
है
- Arman Habib
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नींद
आती
थी
माँ
के
आँचल
में
राहतें
दिल
को
फिर
कहाँ
आईं
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अपने
मीठे
हाथों
से
हर
दिन
वो
पानी
देती
है
सोचो
कितना
मीठा
होगा
जामुन
उसकी
आँगन
का
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किसी
अमल
के
हिसाब
जैसे
तुझे
मैं
देखूँ
जवाब
जैसे
शबाब
तेरी
ये
हुस्न-ए-दिल
में
छलक
पड़ा
है
शराब
जैसे
यूँँ
ख़ूब-सूरत
हँसी
है
तेरी
खिले
चमन
के
गुलाब
जैसे
हैं
मुझ
में
यूँँ
तो
हज़ार
बातें
मगर
हूँ
चुप
मैं
किताब
जैसे
जो
सुब्ह
बिस्तर
से
मैं
उठा
तो
है
देखा
माँ
को
सवाब
जैसे
ये
अब
जो
'अरमान'
मैं
लिखा
हूँ
मगर
था
पहले
ये
ख़्वाब
जैसे
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Arman Habib
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एक
हलचल
सी
होती
रहती
है
जब
से
पत्थर
गड़ा
है
सीने
में
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मैं
ने
सोचा
था
बताने
को
उसे
ग़म
अपना
पर
उसने
पूछा
ही
नहीं
कोई
सबब
ख़ामोशी
का
Arman Habib
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