darte rahe ki gard-e-safar men fana na ho | डरते रहे कि गर्द-ए-सफ़र में फ़ना न हो

  - arjun chamoli
डरतेरहेकिगर्द-ए-सफ़रमेंफ़नाहो
हरगामपरहैख़ौफ़किख़ुदसेख़ताहो
दिलबरवोचाहिएमुझेराह-ए-हयातमें
जोइश्क़कीमिसालहोपरबद-बलाहो
शबइसक़दरउदासहैकटनेलगीहैयूँ
जोनींदभीजाएतोग़मसेरिहाहो
माज़ीकीधूपसाथलिएग़मकीबारिशें
इनसबकेदरमियानकहींरतजगाहो
मौक़ादियाहैवक़्तनेइकगामचलसकूँ
डरहैकिइससफ़रमेंकोईवाक़िआहो
जज़्बातटूटतेहैंतोचेहरेपेदिखतेहैं
मुझकोयेफ़िक्रहैकिकहींज़ाहिराहो
चाहतसभीकीछोड़दीमैंनेयेसोचकर
अबज़िंदगीमेंग़मसेकभीसामनाहो
  - arjun chamoli
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