अपनी बातों से मिरी रूह में हलचल कर दो

  - arjun chamoli
अपनीबातोंसेमिरीरूहमेंहलचलकरदो
मुझकोख़्वाबोंकीसदाओंमेंमुकम्मलकरदो
आरज़ूबनकेजोठहरीहैमिरीपलकोंपर
उसतसव्वुरकोदु'आमानकेक़ाबिलकरदो
दर्दमेंडूबकेबेजानपड़ारहताहूँ
अपनीसाँसोंसेमिरीसाँसभीक़ामिलकरदो
आपकीबातमेंशबनमसीनमीमिलतीहै
इकग़ज़लकहकेमिरीबातभीशामिलकरदो
वोजोरिश्तोंमेंजमीराखहैउड़तीकबहै
बनकेतूफ़ानजमीराखकोओझलकरदो
इश्क़कीशर्तहैयेसब्रकाज़िंदारहना
सब्रइतनाकराओकिमुसज्ज़लकरदो
तुमअगरछूलोतोहरज़ख़्मभीभरजाएगा
इकदफ़ाछूकेज़राज़ख़्मकोमुबतलकरदो
तुमजोचाहोतोमैंख़ुदकोभीबदललूँजानाँ
आज'अर्जुन'कीमोहब्बतकोमुसलसलकरदो
  - arjun chamoli
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