उम्र लग गई है इक ये मक़ाम पाने में

  - Anuj kumar
उम्रलगगईहैइकयेमक़ामपानेमें
ख़ुदकोयादरखनेमेंउसकोभूलजानेमें
ज़िक्रगयाउसकाफिरकिसीफ़सानेमें
रोपड़ाफफककेमैंबातवोबतानेमें
दिलहीयेनहींमानाग़ैरकेलिएवरना
लोगतोबहुतआएइसगरीब-ख़ानेमें
जानथीहमारीजोऔरलेगयाकोई
सोचतेरहेबसहमइश्क़कोजतानेमें
क्याख़ताहुईमुझसेेकुछपतानहींहैक्यूँँ
होगयामैंदूरउससेउसकोपासलानेमें
छीनलेगएउसकोहाथोंसेमिरेसबलोग
देखतेरहेहमसबआबरूबचानेमें
मर्ज़ी-ए-क़ज़ातोदेखपाईक्यासज़ातोदेख
ज़िन्दगीगँवाईहैज़िन्दगीबनानेमें
ऐसाक्यालिखाउसनेनज़्म-ए-इश्क़मेंअपनी
आँखेंजोभरआईवोनज़्मगुनगुनानेमें
पूछतेहोमुझसेेतुमक्यूँँसबबउदासीका
मिलताहैमज़ातुमकोक्यामुझेरुलानेमें
हाल-ए-ज़िन्दगीमेराहैबहुतअजबहीदोस्त
सबलुटादियामैंनेइश्क़आज़मानेमें
छूटतेगएमुझसेेइसतरहसभीअपने
रेतछूटतीहैज्यूँमुट्ठीमेंदबानेमें
वोछुड़ाकेमुझसेेहाथजोचलागयातबसे
रोज़-ओ-शबगुज़रतेहैंबसकिताब-ख़ानेमें
इश्क़कोछुपाकरभीतुमछुपानहींसकते
बातेंहोतीहैंजाहिरबातेंसबछुपानेमें
तुमवफ़ाकीख़ातिरजोहोगएतबाहइसकी
हैनहींकोईक़ीमतआजकेज़मानेमें
शख़्सियतकीमेरीबसहै'अनुज'कहानीये
मिटगएमिरेदुश्मनसबमुझेमिटानेमें
  - Anuj kumar
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